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सेरीकल्चर कार्यालय में कोकून मंडी का हुआ आयोजन
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उधमपुर। सेरीकल्चर कार्यालय में आयोजित दो दिवसीय कोकून मंडी में जिले के विभिन्न हिस्सों से कीट पालकों ने 5.85 लाख रुपये की कोकून बेची। शुक्रवार को मंडी में कोकून के उम्मीद के अनुसार दाम नहीं मिलने पर कीट पालकों ने रोष भी प्रकट किया। वहीं जिला सेरीकल्चर आफिसर ने बताया कि कोकून के दाम गुणवत्ता के हिसाब से मिलते हैं। गुणवत्ता खराब होने से ही कीट पालकों को उम्मीद के अनुसार दाम नहीं मिले हैं।
वर्ष 2022 की दूसरी कोकून मंडी वीरवार को शुरू हुई थी। हालांकि दूसरी कोकून मंडी में बहुत कम कीट पालकों ने कीट पालन किया। दो दिन चली कोकून मंडी में कुल 270 कीट पालकों ने कोकून बेची और इनको इसके कुल दाम 5.85 लाख रुपये मिले। मंडी में अधिकतम दाम 1400 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि औसतन दाम 637 रुपये प्रति किलो रहा। शुक्रवार को कोकून के दाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलने पर कीट पालकों ने रोष जताया। कीट पालकों का कहना था कि इस बार उनको बहुत ही कम दाम मिले हैं। जितनी उन्होंने मेहनत की है, उसके अनुसार दाम नहीं मिल रहे हैं। वहीं ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद बीडीसी घोरडी आरती शर्मा भी मौके पर पहुंच गई और उन्होंने अधिकारियों के साथ बात कर ग्रामीणों की समस्याओं को रखा। मौके पर मौजूद जिला सेरीकल्चर आफिसर राजीव गुप्ता ने बताया कि गुणवत्ता के हिसाब से ही कोकून के दाम मिलते हैं। कोकून खरीदने के लिए बाहरी राज्यों से व्यापारी आए हैं और वे कोकून की गुणवत्ता देखकर ही दाम तय कर रहे हैं। जिन किसानों ने गुणवत्ता वाली कोकून तैयार की है उनको अच्छे दाम मिले हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दोनों सीजन की मंडियों में कुल 5.33 करोड़ की कोकून बेचने में कामयाबी मिली है।
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वर्ष 2022 की दूसरी कोकून मंडी वीरवार को शुरू हुई थी। हालांकि दूसरी कोकून मंडी में बहुत कम कीट पालकों ने कीट पालन किया। दो दिन चली कोकून मंडी में कुल 270 कीट पालकों ने कोकून बेची और इनको इसके कुल दाम 5.85 लाख रुपये मिले। मंडी में अधिकतम दाम 1400 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि औसतन दाम 637 रुपये प्रति किलो रहा। शुक्रवार को कोकून के दाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलने पर कीट पालकों ने रोष जताया। कीट पालकों का कहना था कि इस बार उनको बहुत ही कम दाम मिले हैं। जितनी उन्होंने मेहनत की है, उसके अनुसार दाम नहीं मिल रहे हैं। वहीं ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद बीडीसी घोरडी आरती शर्मा भी मौके पर पहुंच गई और उन्होंने अधिकारियों के साथ बात कर ग्रामीणों की समस्याओं को रखा। मौके पर मौजूद जिला सेरीकल्चर आफिसर राजीव गुप्ता ने बताया कि गुणवत्ता के हिसाब से ही कोकून के दाम मिलते हैं। कोकून खरीदने के लिए बाहरी राज्यों से व्यापारी आए हैं और वे कोकून की गुणवत्ता देखकर ही दाम तय कर रहे हैं। जिन किसानों ने गुणवत्ता वाली कोकून तैयार की है उनको अच्छे दाम मिले हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दोनों सीजन की मंडियों में कुल 5.33 करोड़ की कोकून बेचने में कामयाबी मिली है।
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