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किश्तवाड़ के वाड़वन में जल्द बजेंगी मोबाइल की घंटियां
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किश्तवाड़। जिले के दूरदराज एवं पिछड़े इलाकों में से एक वाड़वन में भी अब जल्द ही मोबाइल की घंटियां बजना शुरू हो जाएंगी। सुविधा मिलने की संभावना से लोगों में उत्साह एवं खुशी की लहर है। इलाके के आफती और बसमीना में निजी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी ने दो स्थापित किए हैं, जिसका मंगलवार को सफल ट्रायल किया गया है। इलाके में सात टॉवर स्थापित होने हैं, जिससे 18 हजार की आबादी को सुविधा मिलेगी।
यह जानकारी डीसी अशोक कुमार शर्मा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर दी। वहीं, प्रेसवार्ता में बताया कि दोनों टॉवर लगभग चालू कर दिए हैं, जिसकी कुछ औपचारिकताएं शेष हैं। जिन्हें पूरा करते ही सेवा शुरू कर दी जाएगी। जल्द ही फाइबर से इन टॉवरों को जोड़ा जाएगा, जिसके लिए पतिमहाला से लेकर मढ़वा और वाड़वन के लिए फाइबर बिछाने का काम होना है। वन विभाग से मंजूरी के लिए से बात चल रही है।
छह माह तक शेष दुनिया से कट जाता है वाड़वन
किश्तवाड़ जिले का वाड़वन क्षेत्र दुर्गम और दूरदराज है। सर्दी के मौसम में बर्फबारी के चलते छह माह तक दुनिया से कट जाता है। आज भी कई इलाके बिजली और उचित सड़क संपर्क के बिना हैं। अगर सड़क संपर्क है भी तो वह कश्मीर से होकर जाता है, जो छह माह तक बंद ही रहता है। जिले से मात्र दच्छन के डंगडीरू तक सड़क बनी है। मढ़वा और वाड़वन के लिए यहां से पैदल सफर करना पड़ता है, जिसमें एक-दो दिन का समय लगता है।
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लद्दाख सीमा से सटे सुखनई तक लगाए जा रहे टॉवर
क्षेत्र में मोबाइल सेवाएं शुरू होने से लोग देश के बाकी हिस्सों से जुड़ जाएंगे। साथ ही प्रशासन और सरकार को इस दूरदराज के क्षेत्र के लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। दो मोबाइल टॉवरों के संचालन के बाद लद्दाख सीमा से लगे सुखनई के सुदूरवर्ती गांव सहित क्षेत्र में और टावर लगाए जा रहे हैं। करीब आधा दर्जन टावर पर काम प्रगति पर है, जो जिले के एक अन्य दूरस्थ मढ़वा क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।
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यह जानकारी डीसी अशोक कुमार शर्मा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर दी। वहीं, प्रेसवार्ता में बताया कि दोनों टॉवर लगभग चालू कर दिए हैं, जिसकी कुछ औपचारिकताएं शेष हैं। जिन्हें पूरा करते ही सेवा शुरू कर दी जाएगी। जल्द ही फाइबर से इन टॉवरों को जोड़ा जाएगा, जिसके लिए पतिमहाला से लेकर मढ़वा और वाड़वन के लिए फाइबर बिछाने का काम होना है। वन विभाग से मंजूरी के लिए से बात चल रही है।
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छह माह तक शेष दुनिया से कट जाता है वाड़वन
किश्तवाड़ जिले का वाड़वन क्षेत्र दुर्गम और दूरदराज है। सर्दी के मौसम में बर्फबारी के चलते छह माह तक दुनिया से कट जाता है। आज भी कई इलाके बिजली और उचित सड़क संपर्क के बिना हैं। अगर सड़क संपर्क है भी तो वह कश्मीर से होकर जाता है, जो छह माह तक बंद ही रहता है। जिले से मात्र दच्छन के डंगडीरू तक सड़क बनी है। मढ़वा और वाड़वन के लिए यहां से पैदल सफर करना पड़ता है, जिसमें एक-दो दिन का समय लगता है।
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लद्दाख सीमा से सटे सुखनई तक लगाए जा रहे टॉवर
क्षेत्र में मोबाइल सेवाएं शुरू होने से लोग देश के बाकी हिस्सों से जुड़ जाएंगे। साथ ही प्रशासन और सरकार को इस दूरदराज के क्षेत्र के लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। दो मोबाइल टॉवरों के संचालन के बाद लद्दाख सीमा से लगे सुखनई के सुदूरवर्ती गांव सहित क्षेत्र में और टावर लगाए जा रहे हैं। करीब आधा दर्जन टावर पर काम प्रगति पर है, जो जिले के एक अन्य दूरस्थ मढ़वा क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।