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Udhampur News: उम्मीद ने बनाया 250 महिलाओं को आत्मनिर्भर, लखपति दीदी के रूप में मिली पहचान

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lakhpati didi
उधमपुर। जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन उम्मीद योजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। स्वयं सहायता समूह के तहत जिले में अब तक 250 महिलाएं लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुकी हैं।
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जेकेआरएलएम उम्मीद की शुरूआत वर्ष 2012-13 में जिले के चिनैनी ब्लाक से की गई। इसके बाद मिशन का पूरे जिले में विस्तार किया गया। मौजूदा समय में जिले में जेकेआरएलएम की ओर से 5405 स्वयं सहायता समूह चलाए जा रहे हैं। इनके साथ जिले की लगभग 50000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। प्रत्येक समुह में 10 महिला सदस्य हैं। विभाग समुह के साथ उन महिलाओं को जोड़ता है जो बेरोजगार, जरूरमंद हैं। योजना का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण महिला को आत्मनिर्भर बनाना है। महिलाओं को उनकी रुचि या फिर कौशल के हिसाब से निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण हासिल करने वाली महिलाओं को अपना यूनिट या फिर उद्योग स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद प्रदान की जाती है।
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अगामी तीन वर्षों में 14000 काे आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
जिले में मौजूदा समय में 5405 सेल्फ हेल्प ग्रुप चल रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वर्ष के साथ-साथ अगले तीन वर्षों में 14000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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दो लखपति दीदी की सफलता की कहानी
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छोटे से मार्ट से थोक व्यापारी बनीं
क्रिमची की रहने वालीं सोनिया ने बताया कि शादी के बाद सिर्फ घर का काम करती थीं। परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थीं। 2018 में जय माता एसएचजी में शामिल हुईं। व्यवसाय चलाने का प्रशिक्षण मिला लेकिन कौन सा व्यवसाय लाभ देगा, इसकी समझ नहीं थी। इलाके में आवश्यक उत्पाद का सर्वेक्षण किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचीं कि प्रिंटिंग और स्टेशनरी का व्यवसाय शुरू करेंगी। पहले छोटी दुकान खोली लेकिन अब थोक व्यापार कर रही हैं। ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर किरपाल सिंह ने बताया कि उधमपुर में लगभग 250 के करीब महिलाएं खुद का कारोबार चला रही हैं।

खुद के साथ 11 को दिया रोजगार
बालियां की रीता देवी ने बताया कि उम्मीद से जुड़ने से पहले वह गृहिणी थीं। वर्ष 2018 में प्रयास स्वयं सहायता समूह में शामिल हुईं। अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहती थीं लेकिन नहीं पता था कि शुरुआत कहां से करूं। पति को खोने के बाद आय का कोई स्रोत भी नहीं था। फिर बागवानी विभाग के साथ मिलकर फलों और सब्जियों के प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण हासिल कर अपने क्षेत्र में अपनी खुद की फल और सब्जी प्रसंस्करण इकाई खोली। अब यह सफल उद्यम में बदल चुकी है। 11 लोगों को भी रोजगार दिया है।
फोटो सहित
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