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Udhampur News: सिलाई का प्रशिक्षण लेकर सुषमा ने खोला बूटीक, बनी आत्मनिर्भर
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उधमपुर। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से बीते वर्ष टेलरिंग का प्रशिक्षण हासिल करने के बाद कैंथगली, पंचैरी की सुषमा देवी ने स्वयं का बूटीक खोल लिया है। इस स्वरोजगार से सुषमा देवी हर महीने 10 से 15 हजार कमा रही है।
सुषमा देवी का कहना है कि दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों की कठिन जलवायु में स्वरोजगार के साधन काफी कम हैं। ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी और खेतीबाड़ी के कामकाज पर ही निर्भर हैं। इसलिए वह कोई ऐसा स्वरोजगार शुरू करना चाहती थी, जिसमें मार्केट तलाशने की परेशानी न हो, क्योंकि डेयरी, मशरूम उत्पादन, अचार-मसाले इत्यादि संबंधित कारोबार के लिए मार्केट बहुत जरूरी है और दूर दराज के पहाड़ी इलाकों के लिए बाजार काफी दूर है।
इसी उधेड़बुन में एक दिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में संचालित होने वाले निशुल्क प्रशिक्षण की जानकारी मिली। इसमें टेलरिंग, ब्यूटी पार्लर, आर्टिफिशियल ज्वैलरी मेकिंग इत्यादि कई ऐसे कोर्स शामिल थे जिनके लिए मार्केटिंग की अधिक जरूरत नहीं हैं। यह घर पर रहते हुए भी हो सकते हैं। इसलिए वहां से टेलरिंग का 30 दिन का कोर्स किया और फिर गांव में अपना बूटीक खोल लिया। यहां स्वरोजगार के साथ घरेलू कामकाज के लिए भी समय एडजस्ट हो जाता है।
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सुषमा देवी ने बताया, अब उनका काम अच्छा चल रहा है और इससे मुझे स्वयं के आत्मनिर्भर होने का अहसास भी होने लगा है। अब गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के काबिल बनाने का प्रयास कर रही हूं।
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सुषमा देवी का कहना है कि दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों की कठिन जलवायु में स्वरोजगार के साधन काफी कम हैं। ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी और खेतीबाड़ी के कामकाज पर ही निर्भर हैं। इसलिए वह कोई ऐसा स्वरोजगार शुरू करना चाहती थी, जिसमें मार्केट तलाशने की परेशानी न हो, क्योंकि डेयरी, मशरूम उत्पादन, अचार-मसाले इत्यादि संबंधित कारोबार के लिए मार्केट बहुत जरूरी है और दूर दराज के पहाड़ी इलाकों के लिए बाजार काफी दूर है।
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इसी उधेड़बुन में एक दिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में संचालित होने वाले निशुल्क प्रशिक्षण की जानकारी मिली। इसमें टेलरिंग, ब्यूटी पार्लर, आर्टिफिशियल ज्वैलरी मेकिंग इत्यादि कई ऐसे कोर्स शामिल थे जिनके लिए मार्केटिंग की अधिक जरूरत नहीं हैं। यह घर पर रहते हुए भी हो सकते हैं। इसलिए वहां से टेलरिंग का 30 दिन का कोर्स किया और फिर गांव में अपना बूटीक खोल लिया। यहां स्वरोजगार के साथ घरेलू कामकाज के लिए भी समय एडजस्ट हो जाता है।
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सुषमा देवी ने बताया, अब उनका काम अच्छा चल रहा है और इससे मुझे स्वयं के आत्मनिर्भर होने का अहसास भी होने लगा है। अब गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के काबिल बनाने का प्रयास कर रही हूं।