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Udhampur News: युवाओं को ट्रैफिक नियमों के बारे में किया जागरूक
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उधमपुर। सड़क सुरक्षा माह के तहत एआरटीओ ने छात्रों और युवाओं को ट्रैफिक नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया।
अभियान के दौरान, एआरटीओ ने व्यस्त चौराहों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर युवा राइडर्स के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इसमें ट्रैफिक अधिकारियों ने लापरवाही से गाड़ी चलाने, ओवरस्पीडिंग और सुरक्षात्मक उपायों के बिना गाड़ी चलाने के खतरों के बारे में बताया।
इस मौके पर एआरटीओ मुदस्सिर इकबाल ने कहा कि अगर राइडर्स बेसिक ट्रैफिक नियमों का पालन करें तो कई जानलेवा हादसों से बचा जा सकता है। हेलमेट सिर्फ एक कानूनी जरूरत नहीं है, यह एक ढाल है जो जान बचाती है। युवाओं को यह समझना चाहिए कि सुरक्षा सबसे पहले आती है।
इस अभियान में नियम तोड़ने वालों के लिए मौके पर ही काउंसलिंग भी शामिल थी, जिसमें सिर्फ जुर्माने पर ध्यान देने के बजाय व्यवहार में बदलाव लाने पर जोर दिया गया। कई युवाओं ने इस तरीके की तारीफ़ की और कहा कि ऐसी पहल उन्हें असुरक्षित ड्राइविंग के नतीजों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।
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माता-पिता, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने एआरटीओ के प्रयासों की तारीफ की और इस अभियान को सही समय पर और असरदार बताया। सामाजिक संगठनों और ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने भी समर्थन दिया और उम्मीद जताई कि लगातार जागरूकता कार्यक्रमों से सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की लगातार कोशिशों से युवाओं में सड़क अनुशासन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है, जिससे आखिरकार अनगिनत जानें बचाई जा सकेंगी।
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अभियान के दौरान, एआरटीओ ने व्यस्त चौराहों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर युवा राइडर्स के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इसमें ट्रैफिक अधिकारियों ने लापरवाही से गाड़ी चलाने, ओवरस्पीडिंग और सुरक्षात्मक उपायों के बिना गाड़ी चलाने के खतरों के बारे में बताया।
इस मौके पर एआरटीओ मुदस्सिर इकबाल ने कहा कि अगर राइडर्स बेसिक ट्रैफिक नियमों का पालन करें तो कई जानलेवा हादसों से बचा जा सकता है। हेलमेट सिर्फ एक कानूनी जरूरत नहीं है, यह एक ढाल है जो जान बचाती है। युवाओं को यह समझना चाहिए कि सुरक्षा सबसे पहले आती है।
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इस अभियान में नियम तोड़ने वालों के लिए मौके पर ही काउंसलिंग भी शामिल थी, जिसमें सिर्फ जुर्माने पर ध्यान देने के बजाय व्यवहार में बदलाव लाने पर जोर दिया गया। कई युवाओं ने इस तरीके की तारीफ़ की और कहा कि ऐसी पहल उन्हें असुरक्षित ड्राइविंग के नतीजों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।
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माता-पिता, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने एआरटीओ के प्रयासों की तारीफ की और इस अभियान को सही समय पर और असरदार बताया। सामाजिक संगठनों और ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने भी समर्थन दिया और उम्मीद जताई कि लगातार जागरूकता कार्यक्रमों से सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की लगातार कोशिशों से युवाओं में सड़क अनुशासन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है, जिससे आखिरकार अनगिनत जानें बचाई जा सकेंगी।