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Udhampur News: औद्योगिक हस्तशिल्प व हथकरघा सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र बांटे
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संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। जिले के कारीगर एवं बुनकर समुदाय के उत्थान की पहल करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त पवन कोतवाल ने शुक्रवार को नवगठित औद्योगिक हस्तशिल्प एवं हथकरघा सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरित किए। उनके साथ हस्तशिल्प विभाग के प्रदीप शान भी मौजूद रहे।
हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग की वित्तीय सहायता योजना के तहत दो समितियों को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई, जिनमें कुंतवाड़ा व्हीट स्ट्रॉ हैंडीक्राफ्ट्स इंडिसको लिमिटेड, अकरहांग कुंतवाड़ा और स्नो वैली कटिंग टेलरिंग हैंडलूम इंडिसको लिमिटेड, पासरकोट चत्तरू शामिल हैं। इन समितियों को हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय, जम्मू के तत्वावधान में पंजीकृत किया गया है, जो आत्मनिर्भर अधिनियम 1999 के तहत सहकारी आधारित सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए विभाग की पहल का हिस्सा है।
इस योजना के तहत 11 पंजीकृत कारीगर व बुनकर समिति बना सकते हैं, जिसे दो समान गैर-वापसी योग्य किस्तों में एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी। वित्तीय सहायता के अलावा यह योजना स्थानीय शिल्प के लिए बिक्री और दृश्यता को बढ़ावा देने के लिए विपणन सहायता भी प्रदान करती है। इस पहल का उद्देश्य कारीगरों और बुनकरों के बीच आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है ताकि वे एक ही मंच पर सामूहिक रूप से काम कर सकें।
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एडीसी किश्तवाड़ ने हस्तशिल्प विभाग के प्रयासों की सराहना की और सरकारी योजनाओं से व्यापक लाभ सुनिश्चित करने के लिए अधिक कारीगरों और बुनकरों को पंजीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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किश्तवाड़। जिले के कारीगर एवं बुनकर समुदाय के उत्थान की पहल करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त पवन कोतवाल ने शुक्रवार को नवगठित औद्योगिक हस्तशिल्प एवं हथकरघा सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरित किए। उनके साथ हस्तशिल्प विभाग के प्रदीप शान भी मौजूद रहे।
हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग की वित्तीय सहायता योजना के तहत दो समितियों को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई, जिनमें कुंतवाड़ा व्हीट स्ट्रॉ हैंडीक्राफ्ट्स इंडिसको लिमिटेड, अकरहांग कुंतवाड़ा और स्नो वैली कटिंग टेलरिंग हैंडलूम इंडिसको लिमिटेड, पासरकोट चत्तरू शामिल हैं। इन समितियों को हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय, जम्मू के तत्वावधान में पंजीकृत किया गया है, जो आत्मनिर्भर अधिनियम 1999 के तहत सहकारी आधारित सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए विभाग की पहल का हिस्सा है।
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इस योजना के तहत 11 पंजीकृत कारीगर व बुनकर समिति बना सकते हैं, जिसे दो समान गैर-वापसी योग्य किस्तों में एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी। वित्तीय सहायता के अलावा यह योजना स्थानीय शिल्प के लिए बिक्री और दृश्यता को बढ़ावा देने के लिए विपणन सहायता भी प्रदान करती है। इस पहल का उद्देश्य कारीगरों और बुनकरों के बीच आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है ताकि वे एक ही मंच पर सामूहिक रूप से काम कर सकें।
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एडीसी किश्तवाड़ ने हस्तशिल्प विभाग के प्रयासों की सराहना की और सरकारी योजनाओं से व्यापक लाभ सुनिश्चित करने के लिए अधिक कारीगरों और बुनकरों को पंजीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया।