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नेकां की नाव में दरार: कैबिनेट विस्तार बना मुसीबत, 48 घंटे में बदल सकता है जम्मू-कश्मीर का सियासी समीकरण

Sun, 01 Nov 2026 01:22 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 01 Nov 2026 01:22 PM IST
सार

कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष गहराता जा रहा है। रुहुल्ला तीन नवंबर को इस्तीफा देने पर अडिग हैं, जबकि मुबारक गुल चार नवंबर को चुप्पी तोड़ेंगे। 18 नाराज विधायकों की बैठक और नेतृत्व को भेजे गए ज्ञापन के बीच पार्टी में टूट और तीसरे मोर्चे के गठन की अटकलें तेज हो गई हैं।

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Turmoil within NC over Omar government's cabinet expansion
नेकां के सामने बड़ी चुनौती - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उमर सरकार की कैबिनेट विस्तार के बाद से नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) में उठी रार थमती नजर नहीं आ रही है। नेकां के लिए अगले 48 घंटे चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं। नाराज विधायकों की सियासी कदम तेजी से इधर-उधर चलते दिख रहे हैं। रुहुल्ला तीन नवंबर को इस्तीफे पर अटल हैं। मुबारक गुल चार को चुप्पी तोड़ने और पार्टी के अंदरूनी हालात उजागर करने अडिग हैं। पार्टी की टूट की आशंका के बीच तीसरे मोर्चे की अटकलों को भी हवा मिल रही है।

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इसी बीच, श्रीनगर लोकसभा सीट से रुहुल्ला के इस्तीफे अंतिम मानते हुए नेकां संगठन ने भी विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को यहां से उम्मीदवार बनाने पर मंथन शुरू कर दिया है। वहीं, नेकां से नाराज कई विधायकों के संपर्क में होने का दावा करने वाली भाजपा ने चुपचाप दांव चलने की तैयारी कर रखी है।जम्मू-कश्मीर की सियासत में इस समय सबसे अधिक चर्चा रुहुल्ला और मुबारक गुल के अगले कदम और बगावत की सूरत में नेकां के भविष्य को लेकर है। अगर रुहुल्ला और गुल राजनीतिक मंच पर साथ आते हैं तो नेकां के अंदर की नाराजगी एक नया आकार ले सकती है।

दोनों की नाराजगी के कारण बेशक अलग हैं, लेकिन इससे पार्टी अंदरूनी संकट से रूबरू है। एक तरफ वैचारिक असंतोष है तो दूसरी तरफ पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व का सवाल। रुहुल्ला की नाराजगी अनुच्छेद 370, जम्मू-कश्मीर के सांविधानिक अधिकारों और नेकां के चुनावी वादों को लेकर है। वहीं, सात बार के विधायक गुल हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद से नाराज हैं। रुहुल्ला कह चुके हैं कि तीन नवंबर के बाद वे समान राजनीतिक विचार रखने वाले लोगों से बातचीत करेंगे। किसी नए सियासी मंच की संभावना से उन्होंने इन्कार नहीं किया है।

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तो स्पीकर की कुर्सी पर होंगे नजीर गुरेजी
सूत्रों के अनुसार रुहुल्ला इस्तीफा दे ही देते हैं तो विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को श्रीनगर से उम्मीदवार बनाने की स्थिति में वरिष्ठ विधायक नजीर अहमद खान गुरेजी को स्पीकर की कुर्सी पर बैठाए जाने की चर्चा है। नेकां की ये रणनीति कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी में उपजे असंतोष को शांत करने का हिस्सा मानी जा रही है।-अगर इस फॉर्मूले पर अंतिम मुहर लगती है तो यह पार्टी के विधायी नेतृत्व में एक बड़ा संतुलन साबित होगा, जिसके तहत राथर केंद्रीय राजनीति (संसद) का रुख करेंगे और गुरेजी को विधानसभा का स्पीकर पद मिलेगा।

किस हालात में क्या होगा असररूहुल्लाह श्रीनगर-बड़गाम के सांसद हैं, जबकि मुबारक गुल विधानसभा के विधायक हैं। रूहुल्ला के लोकसभा से इस्तीफे का जम्मू-कश्मीर विधानसभा की संख्या पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर मुबारक गुल के साथ दूसरे असंतुष्ट विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं या अलग मोर्चा बनाते हैं तो विधानसभा का राजनीतिक समीकरण सीधे-सीधे प्रभावित होगा।

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जब नेकां अनुच्छेद 370 और अन्य मुद्दों पर राजनीतिक संघर्ष नहीं करना चाहती तो वह पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपनी सांसद सीट क्यों रखें? मैं अपने इस फैसले के राजनीतिक परिणामों के लिए तैयार हूं। सैद्धांतिक राजनीति में विश्वास रखने वाले लोगों से बड़गाम के कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए। -रुहुल्ला मेहंदी

कैबिनेट फेरबदल के बाद कुछ विधायकों और बाहर किए गए नेताओं में थोड़ी निराशा होना स्वाभाविक है। कई विधायक एक साथी के आवास पर भोजन के लिए एकत्र हुए थे। उन्होंने पार्टी मामलों पर चर्चा की थी, लेकिन इसे बगावत नहीं कहा जा सकता। किसी भी विधायक ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत या पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। मंत्रियों को शामिल करने या हटाने के फैसले को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विशेषाधिकार बताया। -जाविद अहमद डार, कैबिनेट मंत्री

नेकां मजबूत पार्टी है। वरिष्ठ सहयोगियों के साथ हुई हालिया बैठक एक सामान्य चर्चा थी, जिसे मीडिया ने अनावश्यक तूल दिया। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व विधायकों की जायज शिकायतों को सुनकर उनका समाधान करेगा। मियां अल्ताफ, नजीर गुरेजी और हसनैन मसूदी जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी के मजबूत स्तंभ हैं और कहीं नहीं जा रहे हैं। महासचिव पद के बदलाव को कुछ समय की प्रशासनिक व्यवस्था करार दिया। -सलमान अली सागर, वरिष्ठ नेता, नेकां

शीर्ष नेताओं के आवासों पर भेजे ज्ञापनश्रीनगर। नेकां के विधायकों ने मंत्रिमंडल फेरबदल व विस्तार को लेकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को उन्होंने शीर्ष नेताओं के आवासों पर मांगों से संबंधित ज्ञापन भेजे। इसमें नए सिरे से मंत्रिमंडल फेरबदल, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए संघर्ष तेज करने, 2024 के चुनावी घोषणापत्र को तय समय में लागू करे, सलाहकार नासिर असलम वानी समेत दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके मंत्रियों को हटाए जाने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। यह ज्ञापन शुक्रवार दोपहर लोलाब से नेकां विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर 18 विधायकों की हुई बैठक के दौरान तैयार किया गया।

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