{"_id":"695825181aab5062520b9cd5","slug":"srinagar-highcourt-gave-bailm-three-accused-womens-murder-case-srinagar-news-c-10-lko1027-801560-2026-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में तीन महिलाओं को दी जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में तीन महिलाओं को दी जमानत
विज्ञापन
- कहा, कानून में महिलाओं के लिए अलग प्रावधान पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने अनंतनाग जिले के 2023 के एक हत्या मामले में आरोपी तीन महिलाओं को जमानत दे दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कानून महिलाओं को एक अलग श्रेणी मानता है। गैर-जमानती अपराधों में भी उन्हें जमानत के मामले में विशेष विचार दिया जाना चाहिए।
जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने चेरी पांजगाम कोकरनाग निवासी सलीमा बानो, रेशमा और रुबीना की जमानत अर्जी मंजूर की। ये महिलाएं पुलिस स्टेशन लारनू में दर्ज एफआईआर में 14 आरोपियों में शामिल हैं। मामला शुरू में हत्या का प्रयास शामिल था, के तहत दर्ज हुआ था लेकिन पीड़ित अली मोहम्मद डार की मौत के बाद इसे धारा 302 (हत्या) में बदल दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि धारा 437(1) का प्रावधान महिलाओं को स्वत: जमानत का हक नहीं देता लेकिन यह अदालत पर तुरंत यह जिम्मेदारी डालता है कि पुरुष आरोपियों पर लागू सख्त मानकों से बंधे बिना महिलाओं की जमानत पर विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा, सीआरपीसी 1973 के निर्माताओं ने इस प्रावधान के जरिए महिलाओं को गैर-जमानती अपराधों की आरोपी के रूप में एक अलग वर्ग माना है जिसे जमानत में पुरुषों जैसी सख्ती का शिकार नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने अनंतनाग जिले के 2023 के एक हत्या मामले में आरोपी तीन महिलाओं को जमानत दे दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कानून महिलाओं को एक अलग श्रेणी मानता है। गैर-जमानती अपराधों में भी उन्हें जमानत के मामले में विशेष विचार दिया जाना चाहिए।
जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने चेरी पांजगाम कोकरनाग निवासी सलीमा बानो, रेशमा और रुबीना की जमानत अर्जी मंजूर की। ये महिलाएं पुलिस स्टेशन लारनू में दर्ज एफआईआर में 14 आरोपियों में शामिल हैं। मामला शुरू में हत्या का प्रयास शामिल था, के तहत दर्ज हुआ था लेकिन पीड़ित अली मोहम्मद डार की मौत के बाद इसे धारा 302 (हत्या) में बदल दिया गया।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि धारा 437(1) का प्रावधान महिलाओं को स्वत: जमानत का हक नहीं देता लेकिन यह अदालत पर तुरंत यह जिम्मेदारी डालता है कि पुरुष आरोपियों पर लागू सख्त मानकों से बंधे बिना महिलाओं की जमानत पर विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा, सीआरपीसी 1973 के निर्माताओं ने इस प्रावधान के जरिए महिलाओं को गैर-जमानती अपराधों की आरोपी के रूप में एक अलग वर्ग माना है जिसे जमानत में पुरुषों जैसी सख्ती का शिकार नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन