लेह हिंसा की पहली बरसी: एक साल बाद भी सवाल बरकरार, नहीं आई जांच रिपोर्ट, चार मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि
लेह हिंसा की पहली बरसी पर लद्दाख के कई हिस्सों में बंद रहा और चार मृतकों की याद में लेह के एनडीएस ग्राउंड में प्रार्थना सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। सभा में नेताओं और लोगों ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक न किए जाने पर नाराजगी जताते हुए रिपोर्ट जारी करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले वर्ष 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की पहली बरसी पर वीरवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बंद रहा। इस हिंसा में जान गंवाने वाले चार लोगों की याद में लेह और कारगिल में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे।
सड़कों पर यातायात न के बराबर दिखा जिससे सामान्य जनजीवन खासा प्रभावित हुआ। केंद्र शासित प्रदेश में स्थानीय लोगों ने इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया। हिंसा के पीड़ितों की याद में लेह के एनडीएस ग्राउंड में लद्दाख बौद्ध संघ (एलबीए) की ओर से सुबह 10 बजे एक विशाल प्रार्थना सभा आयोजित की गई।
इस सभा में ड्रुकपा थुकसे रिनपोछे समेत कई शीर्ष बौद्ध भिक्षुओं ने मृतकों की स्मृति में प्रार्थना की। कार्यक्रम के दौरान लद्दाख के लिए न्याय और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से दोहराया गया। लद्दाख पुलिस की ओर से जारी बयान के अनुसार इस कार्यक्रम में 800 से कम लोगों ने हिस्सा लिया।
रिपोर्ट सार्वजनिक न होने पर उठा सवाल
प्रार्थना सभा में नेताओं और आम लोगों ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि घटना की जांच के लिए गठित किए गए न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट एक साल बीत जाने के बाद भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। सभी ने सरकार से जल्द से जल्द रिपोर्ट जारी कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
सभा को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष छेरिंग दोरजे लाक्रुक, लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलई के अलावा अन्य नेताओं ने संबोधित किया। नेताओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई तेज करने का आह्वान किया।
स्पष्ट हो कि किन परिस्थितियों में गोली चलाई गई : वांगचुक
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के सदस्य और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ केंद्र सरकार से बातचीत में शामिल रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 सितंबर की घटना को लेकर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि हिंसा का एक वर्ष बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में स्पष्ट होना चाहिए कि किन परिस्थितियों में गोलीबारी हुई, क्या गोली चलाने का कोई आदेश जारी किया गया था, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल कैसे किया गया और हिंसा कैसे शुरू हुई। वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लद्दाख की घटना की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। यदि जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तो सेवानिवृत्त जजों और अन्य लोगों का एक पीपुल्स ट्रिब्यूनल बनाया जाए।
लद्दाख को बांटने की साजिशों का हो विरोध, पीड़ितों को मिले न्याय : करबलई
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलई ने लोगों से एकजुट रहने और क्षेत्र को धार्मिक, क्षेत्रीय तथा राजनीतिक आधार पर बांटने के प्रयासों का विरोध करने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से लोगों पर कार्यक्रमों में शामिल न होने के लिए दबाव बनाया गया।
उन्होंने कहा, आप पूरे लद्दाख में सुरक्षा बल तैनात कर सकते हैं, लेकिन हमारी आवाज को दबा नहीं सकते। उन्होंने लद्दाख में भूमि से संबंधित प्रस्तावित नियमों और विनियमों को लेकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की। लोग किसी भी आर्थिक या अन्य आश्वासन के बदले अपनी जमीन अथवा अधिकारों से समझौता न करें।
वित्तीय लाभ या बढ़े हुए मानदेय को लोगों के हितों से जुड़े फैसलों पर प्रभाव न डालने दें। उन्होंने कहा कि लेह हिंसा में मारे गए लोगों को दिया जा रहा मुआवजा मांगों की तुलना में प्रस्तावित राशि अपर्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख को बौद्ध-मुस्लिम, क्षेत्रीय, जिला और हिल काउंसिल के आधार पर विभाजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। करबलई ने पूर्व हिल काउंसिल प्रतिनिधियों से जुड़ी हालिया प्रशासनिक बैठक के फैसले पर सवाल उठाया। कहा कि संबंधित सरकारी आदेशों की प्रतियां सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी।
लद्दाख के लिए ठोस प्रस्ताव लाए केंद्र सरकार
लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने पिछले वर्ष 24 सितंबर को हुई हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार न्याय चाहते हैं। उन्होंने उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत इन मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। सांसद ने कहा कि लद्दाख के इस आंदोलन में भूख हड़ताल, पदयात्रा और केंद्र सरकार के समक्ष क्षेत्र की मांगें रखने के लिए किए गए कई अन्य शांतिपूर्ण प्रयास शामिल रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासन से जान गंवाने वालों के परिवारों को पर्याप्त और उचित मुआवजा देने की मांग की।