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Srinagar News: एनसीसी कैडेट ने कुनान पोशपोरा पर लिखी किताब सीओएएस को सौंपी
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सीओएएस को कुनान पोशपोरा पर लिखी किताब सौंपते एनसीसी कैडेट। स्रोत स्वयं
श्रीनगर। पुंछ के सुरनकोट के रहने वाले एनसीसी कैडेट हारून इम्तियाज ने अपनी लिखी वाय कुनान पोशपोरा नामक किताब की एक प्रति भारतीय सेना के प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी को भेंट की।
17 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित बुक फेयर के दौरान हारून ने सीओएएस को किताब की ये प्रति भेंट की। ये किताब हारून ने जुलाई 2025 में लिखी थी। जम्मू की निवासी और एनसीसी कैडेट कोमल वर्मा ने किताब का सह-लेखन किया है। वाय कुनान पोशपोरा कुपवाड़ा जिले का एक गांव है। इस पर ही यह किताब आधारित है। जम्मू-कश्मीर के इस युवा लेखक की यह पहल क्षेत्र के युवाओं की साहस और बौद्धिक ईमानदारी का प्रतीक है।
किताब के माध्यम से वे भारत-विरोधी तत्वों और पाकिस्तान द्वारा गढ़ी जा रहीं झूठी कहानियों का खंडन करने का प्रयास किया गया है जो राष्ट्र को अस्थिर करने की कोशिश करती हैं। यह किताब कुनन पोषपोरा मुद्दे पर शोध-आधारित और संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ये अंग्रेजी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखी गई है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे पढ़ सकें। हारून इम्तियाज की यह पहल युवाओं और एनसीसी कैडेटों की राष्ट्र निर्माण, बौद्धिक विमर्श और साहित्य के माध्यम से सत्य की खोज में सकारात्मक भूमिका को दर्शाती है।
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यह किताब न केवल एक साहित्यिक कृति है, बल्कि सच्चाई और राष्ट्रभक्ति की मजबूत आवाज भी है। संवाद
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17 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित बुक फेयर के दौरान हारून ने सीओएएस को किताब की ये प्रति भेंट की। ये किताब हारून ने जुलाई 2025 में लिखी थी। जम्मू की निवासी और एनसीसी कैडेट कोमल वर्मा ने किताब का सह-लेखन किया है। वाय कुनान पोशपोरा कुपवाड़ा जिले का एक गांव है। इस पर ही यह किताब आधारित है। जम्मू-कश्मीर के इस युवा लेखक की यह पहल क्षेत्र के युवाओं की साहस और बौद्धिक ईमानदारी का प्रतीक है।
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किताब के माध्यम से वे भारत-विरोधी तत्वों और पाकिस्तान द्वारा गढ़ी जा रहीं झूठी कहानियों का खंडन करने का प्रयास किया गया है जो राष्ट्र को अस्थिर करने की कोशिश करती हैं। यह किताब कुनन पोषपोरा मुद्दे पर शोध-आधारित और संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ये अंग्रेजी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखी गई है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे पढ़ सकें। हारून इम्तियाज की यह पहल युवाओं और एनसीसी कैडेटों की राष्ट्र निर्माण, बौद्धिक विमर्श और साहित्य के माध्यम से सत्य की खोज में सकारात्मक भूमिका को दर्शाती है।
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