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Srinagar News: करफल्ली मोहल्ले में झेलम वाटर चैनल की अनदेखी से पैदा हुआ स्वच्छता संकट
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श्रीनगर के करफल्ली में झेलम नदी में कचरा। संवाद
- फोटो : credit
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पुराने शहर हब्बाकदल में करफल्ली मोहल्ले से गुजरने वाला और झेलम से जुड़ा वाटर चैनल लंबे समय तक अनदेखी के कारण खुले कूड़ेदान में बदल गया है। इससे स्थानीय लोगों में स्वच्छता और पर्यावरण संकट के साथ स्वास्थ्य संबंधित जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
असल में यह चैनल सिंचाई और सीमित घरेलू इस्तेमाल के लिए साफ बहता पानी ले जाने के लिए बनाया गया था लेकिन अब यह प्लास्टिक कचरे, घरेलू कूड़े और निर्माण सामग्री से बुरी तरह जाम हो गया है। निवासियों का आरोप है कि नियमित रूप से गाद निकालने और सफाई की कमी, कमजोर निगरानी सिस्टम और आस-पास के इलाकों के लोगों द्वारा बिना रोक-टोक के कूड़ा फेंकने के कारण यह चैनल लगभग बेकार हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार रुकावट के कारण पानी जमा हो गया है। बहुत ज्यादा बदबू आ रही है। गर्मियों में तो मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए। वाटर चैनल के पास रहने वाले परिवारों को अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं।
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एक बुजुर्ग गुलाम मोहियुद्दीन (87) ने बताया कि यह चैनल कभी हमारे इलाके के लिए जीवन रेखा हुआ करती थी। इसके साफ बहते पानी से रोजमर्रा की जरूरतों पूरा होती थी। आज यह आम जनता की लापरवाही और सरकारी अनदेखी के कारण बीमारियों का स्रोत बन गई है। संबंधित विभागों को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। एक अन्य स्थानीय गुलजार अहमद ने कहा कि इसमें लोगों की जिम्मेदारी बनती है लेकिन सरकार की भी यह जिम्मेदारी है कि इसपर कार्रवाई करे। अगर बार-बार अवगत कराया गया है तो फिर इसको लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमें पानी से होने वाली बीमारियों के फैलने का डर है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से जमा कचरा हटाकर पानी के प्राकृतिक बहाव को बहाल करके और चैनल के नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करके तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने जलमार्ग में कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ ही आगे दुरुपयोग को रोकने के लिए चेतावनी वाले साइन बोर्ड लगाने और निगरानी रखने की भी मांग की है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी कि लगातार निष्क्रियता से लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान हो सकता है और गंभीर जनस्वास्थ्य आपात स्थिति पैदा हो सकती है।
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श्रीनगर। पुराने शहर हब्बाकदल में करफल्ली मोहल्ले से गुजरने वाला और झेलम से जुड़ा वाटर चैनल लंबे समय तक अनदेखी के कारण खुले कूड़ेदान में बदल गया है। इससे स्थानीय लोगों में स्वच्छता और पर्यावरण संकट के साथ स्वास्थ्य संबंधित जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
असल में यह चैनल सिंचाई और सीमित घरेलू इस्तेमाल के लिए साफ बहता पानी ले जाने के लिए बनाया गया था लेकिन अब यह प्लास्टिक कचरे, घरेलू कूड़े और निर्माण सामग्री से बुरी तरह जाम हो गया है। निवासियों का आरोप है कि नियमित रूप से गाद निकालने और सफाई की कमी, कमजोर निगरानी सिस्टम और आस-पास के इलाकों के लोगों द्वारा बिना रोक-टोक के कूड़ा फेंकने के कारण यह चैनल लगभग बेकार हो गया है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार रुकावट के कारण पानी जमा हो गया है। बहुत ज्यादा बदबू आ रही है। गर्मियों में तो मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए। वाटर चैनल के पास रहने वाले परिवारों को अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं।
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एक बुजुर्ग गुलाम मोहियुद्दीन (87) ने बताया कि यह चैनल कभी हमारे इलाके के लिए जीवन रेखा हुआ करती थी। इसके साफ बहते पानी से रोजमर्रा की जरूरतों पूरा होती थी। आज यह आम जनता की लापरवाही और सरकारी अनदेखी के कारण बीमारियों का स्रोत बन गई है। संबंधित विभागों को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। एक अन्य स्थानीय गुलजार अहमद ने कहा कि इसमें लोगों की जिम्मेदारी बनती है लेकिन सरकार की भी यह जिम्मेदारी है कि इसपर कार्रवाई करे। अगर बार-बार अवगत कराया गया है तो फिर इसको लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमें पानी से होने वाली बीमारियों के फैलने का डर है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से जमा कचरा हटाकर पानी के प्राकृतिक बहाव को बहाल करके और चैनल के नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करके तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने जलमार्ग में कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ ही आगे दुरुपयोग को रोकने के लिए चेतावनी वाले साइन बोर्ड लगाने और निगरानी रखने की भी मांग की है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी कि लगातार निष्क्रियता से लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान हो सकता है और गंभीर जनस्वास्थ्य आपात स्थिति पैदा हो सकती है।