कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा के लिए पूर्व सैनिकों का एक विशेष बल बनाया जाना चाहिए, ताकि वे बिना किसी डर के घाटी में लौट कर रह सकें। कश्मीरी पंडितों को तभी वापसी के लिए कहा जाए, जब पूरी व्यवस्था की गई हो। भाजपा नेता और पूर्व सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने यह बातें श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर पार्क में शनिवार को आयोजित अंतर सामुदायिक सांस्कृतिक उत्सव नवरेह मिलन के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि एक लाख पूर्व सैनिकों को उनके परिवार सहित पांच साल के लिए कश्मीर में रहने के लिए आग्रह करेंगे। इसके लिए वेतन आदि भी तय किए जाने चाहिए। स्वामी ने कहा कि कश्मीरी पंडित आएंगे, तो उनकी रक्षा करने के लिए एक स्पेशल फोर्स जरूरी है। जैसे प्रधानमंत्री के ब्लैक कैट्स हैं, एसपीजी कमांडो की तरह कश्मीरी पंडितों के लिए भी स्पेशल फोर्स तैयार होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कितने लोग घर लौटेंगे, लेकिन आम तौर पर जो लोग विदेश नहीं गए हैं या खूब पैसा कमा कर वापस आना चाहते हैं, वह ही आएंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सैनिक कॉलोनी नहीं बननी चाहिए, बल्कि हर शहर में उनको घर बना कर देना चाहिए। उनके लिए स्पेशल टेलीफोन लाइन होनी चाहिए।
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Navreh Festival 2022
- फोटो : अमर उजाला
शारदा पीठ को खोलने के लिए करेंगे बात
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि हमारा यहां कमांडर इन चीफ मुसलमान भाई है। उनको मुझसे डर नहीं है और मुझे उनसे नहीं। एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि अगर उनको विश्वास नहीं है कि हम इनके (कश्मीरी मुसलामानों) बीच नहीं रह सकते, तो उनको अलग रहना चाहिए। पीओके में शारदा पीठ को खोलने की मांग पर कहा कि जोकर (इमरान खान) को निकाला जा रहा है। मिलिट्री की सरकार आएगी, तो मैं उनसे बात करूंगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में कोई लोकतंत्र नहीं है। 1958 के बाद एक भी प्रधानमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।
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वापसी के लिए बने अनुकूल माहौल
स्वामी ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को यहां रहने के लिए वापस लाना है। वहीं सरकार को वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाना चाहिए। उसके लिए चर्चा चल रही है। दिल्ली में कोई भी सरकार तब तक नहीं चलेगी, जब तक कि ये चार-पांच लाख लोग, जिन्हें छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, न्याय नहीं मिलता और घर नहीं लौटते।
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लौटना और सुरक्षित जीने का है अधिकार
भाजपा नेता ने कहा कि कश्मीरी मुसलमानों को यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि पंडितों के लिए अलग कॉलोनियां होंगी या कोई सांस्कृतिक परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। यह उनका लौटने का अधिकार है। सुरक्षित जीने का अधिकार है। उन्हें वह सब कुछ मिलेगा, जो यहां सभी को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पंडित अलग-अलग कॉलोनियों में पांच से छह साल तक रह सकते हैं, ताकि विश्वास पैदा किया जा सके।
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सभी कश्मीरी पंडितों की वापसी तक नहीं मिटेगा दाग
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता जावेद बेग ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी बुरे दौर से गुजरे हैं, खासकर हमारे कश्मीरी पंडित भाई। उन्होंने तो अपनी धरती और आसमान खो दिया। इसका मुझे बहुत दुख है। मुझे उस दिन का इंतजार है, जिस दिन हम सब वैसे ही अपने मोहल्लों में रहेंगे, जहां 30 साल पहले रहा करते थे। बेग ने कहा कि मुझे फख्र है कि मैं उस धरती से हूं जहां धार्मिक सौहार्द है। हमारे ऊपर एक दाग लगा है। जब तक आखिरी कश्मीरी पंडित को यहां नहीं बसाया जाता, तब तक यह दाग नहीं मिट पाएगा।