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Kashmir: दस साल से अधिक समय बीता, नहीं पूरा हुआ सुंबल फुट ब्रिज का निर्माण, ग्रामीणों को हो रही मुश्किलें
Sat, 29 Nov 2025 01:10 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Sat, 29 Nov 2025 01:10 PM IST
सार
सुंबल फुटब्रिज का निर्माण दस साल से अधूरा पड़ा है, जिससे झेलम नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले 14 गांवों के लोग रोजाना लंबा और कठिन रास्ता तय करने को मजबूर हैं। अधूरे निर्माण और बढ़ते नदी स्तर के कारण मरीज, छात्र और कामकाजी लोगों को खासतौर पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बांदीपोरा जिले के सुंबल इलाके में अधूरा पड़ा फुट ब्रिज का निर्माण कार्य।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दस साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी जिले का सुंबल फुटब्रिज अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे झेलम नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र, मरीज और कामकाजी लोगों को लंबा रास्ता तय कर आना-जाना पड़ रहा है।
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स्थानीय निवासी रहबर वानी का कहना था कि पुल का निर्माण कार्य पूरा न होने के चलते उन हजारों लोग परेशान हैं। ये ल इस मार्ग पर निर्भर हैं। पुराना लकड़ी का फुटब्रिज जिस पर पहले हर दिन भारी आवाजाही होती थी, 2013 में असुरक्षित घोषित होने के कारण गिरा दिया गया था।
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स्थानीय निवासी इरफान ने कहा कि पुल का निर्माण कार्य अधर में होने के कारण लोगों को मजबूरन लंबा सफर तय कर आना जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब लकड़ी के फुटब्रिज पुल को तोड़ा गया था तो उस समय वादे किए गए थे कि जल्द ही इसकी जगह नया पुल तैयार कर दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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एक अन्य स्थानीय निवासी जहूर अहमद ने बताया कि असली समस्या तो पुराने पुल को तोड़ने के बाद शुरू हुई। सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि जल्द ही एक मजबूत पैदल पुल बनेगा। लेकिन फरवरी 2014 में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री मोहम्मद अकबर लोन ने आधार शिला रखी जिससे लोगों को विश्वास हो गया कि जल्द ही पुल बनकर तैयार हो जाएगा लेकिन इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक पूरा नहीं हो सका। यह पुल 14 गांवों को आपस में जोड़ता है।
रियाज अहमद कहा कि जब से पुल की नींव रखी गई थी उसके बाद जम्मू कश्मीर में कम से कम तीन मुख्यमंत्री रहे लेकिन पुल अधूरा ही रह गया। उन्होंने कहा कि खासतौर पर इस पुल के निर्माण कार्य पूरा न होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पुल न होने की वजह से लंबा सफर तय कर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि 2019 में इस परियोजना की लागत लगभग 4.1 करोड़ रुपये आंकी गई थी। जिसके चलते कुछ समय के लिए निर्माण कार्य कर बीच में ही छोड़ दिया गया था लेकिन मौजूदा समय में बढ़ते नदी स्तर ने बनाए गए स्तंभों को क्षतिग्रस्त कर दिया है।