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Srinagar News: केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने डाला बौद्ध विरासत पर प्रकाश
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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू लेह में एक सभा को संबोधित करते हुएस्रोत - सूचना विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
- लेह में बकुला रिनपोछे व्याख्यान शृंखला का किया उद्घाटन
लेह। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लेह के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्ध स्टडीज में मंगलवार को बकुला रिनपोछे स्मृति व्याख्यान शृंखला का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे कुशोक बकुला रिनपोछे तथा उनके शांति और राष्ट्र-निर्माण की विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
भिक्षुओं, विद्वानों तथा छात्रों से संवाद करते हुए रिजिजू ने कहा कि यह व्याख्यान शृंखला पूज्य नेता की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने तथा भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने में सहायक होगी। उन्होंने बकुला रिनपोछे को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके लद्दाख तथा विदेशों में बौद्ध धर्म के पुनरुद्धार में योगदान को याद किया।
एक अलग संबोधन में रिजिजू ने वेसाक बुद्ध पूर्णिमा के दौरान गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेषों के लद्दाख पहुंचने को ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने इस दुर्लभ प्रदर्शन को सुगम बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
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बुद्ध की भूमि के रूप में भारत की पहचान पर प्रकाश डालते हुए रिजिजू ने कहा कि बौद्ध मूल्यों के प्रति वैश्विक श्रद्धा शांति तथा करुणा की शिक्षाओं को संरक्षित एवं प्रचारित करने की आवश्यकता को मजबूत करती है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में बौद्ध समुदायों के लिए सरकार की पहलों का उल्लेख किया जिसमें मठों का पुनर्स्थापन, आध्यात्मिक पर्यटन का प्रोत्साहन तथा विकास कार्यक्रम शामिल हैं।
केंद्र की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराते हुए रिजिजू ने कहा कि लद्दाख का सांस्कृतिक संरक्षण तथा विकास प्राथमिकता बना रहेगा। क्षेत्र को शांति, एकता तथा आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताते हुए प्रशंसा की। संवाद
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- लेह में बकुला रिनपोछे व्याख्यान शृंखला का किया उद्घाटन
लेह। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लेह के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्ध स्टडीज में मंगलवार को बकुला रिनपोछे स्मृति व्याख्यान शृंखला का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे कुशोक बकुला रिनपोछे तथा उनके शांति और राष्ट्र-निर्माण की विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
भिक्षुओं, विद्वानों तथा छात्रों से संवाद करते हुए रिजिजू ने कहा कि यह व्याख्यान शृंखला पूज्य नेता की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने तथा भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने में सहायक होगी। उन्होंने बकुला रिनपोछे को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके लद्दाख तथा विदेशों में बौद्ध धर्म के पुनरुद्धार में योगदान को याद किया।
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एक अलग संबोधन में रिजिजू ने वेसाक बुद्ध पूर्णिमा के दौरान गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेषों के लद्दाख पहुंचने को ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने इस दुर्लभ प्रदर्शन को सुगम बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
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बुद्ध की भूमि के रूप में भारत की पहचान पर प्रकाश डालते हुए रिजिजू ने कहा कि बौद्ध मूल्यों के प्रति वैश्विक श्रद्धा शांति तथा करुणा की शिक्षाओं को संरक्षित एवं प्रचारित करने की आवश्यकता को मजबूत करती है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में बौद्ध समुदायों के लिए सरकार की पहलों का उल्लेख किया जिसमें मठों का पुनर्स्थापन, आध्यात्मिक पर्यटन का प्रोत्साहन तथा विकास कार्यक्रम शामिल हैं।
केंद्र की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराते हुए रिजिजू ने कहा कि लद्दाख का सांस्कृतिक संरक्षण तथा विकास प्राथमिकता बना रहेगा। क्षेत्र को शांति, एकता तथा आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताते हुए प्रशंसा की। संवाद