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श्रीनगर में एफआरटी से हाइब्रिड आतंकवाद पर शिकंजा कस रही पुलिस
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आधुनिक उपकरणों और तकनीक से हाइब्रिड आतंकवाद पर शिकंजा कसा है। इसमें सबसे कारगर साबित हो रही है फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (एफआरटी)। इससे हमलावरों की पहचान कर उन्हें दबोचा जा रहा है। इसके लिए शहर में हाई रेसोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो आतंकियों का चेहरा डिटेक्ट करता है। इसके अलावा शहर के संवेदनशील इलाकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस की कमांड व्हीकल की तैनाती ने भी आतंकियों की मूवमेंट को ट्रैक करने में अहम भूमिका निभाई है। बता दें, पिछले वर्ष तक हाइब्रिड आतंकवाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए बड़ा सिर दर्द बना हुआ था। नई तकनीक से पिछले 6 महीने के भीतर श्रीनगर के लाल चौक व इसके आसपास के संवेदनशील भीड़भाड़ वाले इलाकों में आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। पुलिस खुद कह रही है कि अब हाइब्रिड आतंकवाद उनके लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं है।
लाल चौक से थोड़ी दूर हरि सिंह हाई स्ट्रीट इलाके में आखिरी आतंकी हमला 6 मार्च को हुआ था। ग्रेनेड हमले में युवती और एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी, जबकि 33 के करीब लोग घायल हुए थे। सूत्रों के अनुसार इसी एफआरटी के जरिये ही हमलावरों की शिनाख्त हो पाई थी और पुलिस ने दो दिन के भीतर मोहम्मद बारिक और फाजिल नबी सोफी को गिरफ्तार किया था।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि श्रीनगर शहर के घंटाघर लाल चौक, नागरिक सचिवालय से बटमालू-शेरगढ़ी रोड के अन्य संवेदनशील इलाकों समेत नेशनल हाईवे पर एफ आरटी का प्रयोग किया जा रहा है। इसका कंट्रोल पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) कश्मीर में है। इससे जूम करके संदिग्ध की पहचान की जा सकती है, चाहे वह गाड़ी में क्यों न हो। यही कारण है कि हाल ही में ऑटो चालकों से भी खिड़कियां हटाने को कहा गया था ताकि संदिग्ध की पहचान हो सके।
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बता दें, 23 अक्तूबर 2021 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश के अपने 3 दिवसीय दौरे के दौरान श्रीनगर के राज भवन में सुरक्षा एजेंसियों के साथ एक यूनिफाइड हाई कमांड (यूएचसी) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक द्वारा एफआरटी को लेकर चर्चा की गई थी। गृह मंत्री को जानकारी दी थी कि जम्मू कश्मीर पुलिस आने वाले समय में श्रीनगर म्युनिसिपल कारपोरेशन के साथ मिलकर शहर में एफ आरटी तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। ऐसी तकनीक पहले से तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्य इस्तेमाल कर रहे हैं।
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लाल चौक से थोड़ी दूर हरि सिंह हाई स्ट्रीट इलाके में आखिरी आतंकी हमला 6 मार्च को हुआ था। ग्रेनेड हमले में युवती और एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी, जबकि 33 के करीब लोग घायल हुए थे। सूत्रों के अनुसार इसी एफआरटी के जरिये ही हमलावरों की शिनाख्त हो पाई थी और पुलिस ने दो दिन के भीतर मोहम्मद बारिक और फाजिल नबी सोफी को गिरफ्तार किया था।
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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि श्रीनगर शहर के घंटाघर लाल चौक, नागरिक सचिवालय से बटमालू-शेरगढ़ी रोड के अन्य संवेदनशील इलाकों समेत नेशनल हाईवे पर एफ आरटी का प्रयोग किया जा रहा है। इसका कंट्रोल पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) कश्मीर में है। इससे जूम करके संदिग्ध की पहचान की जा सकती है, चाहे वह गाड़ी में क्यों न हो। यही कारण है कि हाल ही में ऑटो चालकों से भी खिड़कियां हटाने को कहा गया था ताकि संदिग्ध की पहचान हो सके।
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बता दें, 23 अक्तूबर 2021 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश के अपने 3 दिवसीय दौरे के दौरान श्रीनगर के राज भवन में सुरक्षा एजेंसियों के साथ एक यूनिफाइड हाई कमांड (यूएचसी) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक द्वारा एफआरटी को लेकर चर्चा की गई थी। गृह मंत्री को जानकारी दी थी कि जम्मू कश्मीर पुलिस आने वाले समय में श्रीनगर म्युनिसिपल कारपोरेशन के साथ मिलकर शहर में एफ आरटी तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। ऐसी तकनीक पहले से तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्य इस्तेमाल कर रहे हैं।