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ईंधन की बढ़ती कीमतों से कुछ अलग करने की सोची और बना दी सोलर कार
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श्रीनगर। कश्मीर के गणितज्ञ और नवप्रवर्तनक बिलाल अहमद को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने परेशान किया तो उन्होंने कुछ अलग करने की सोची। 11 साल की मेहनत के बाद उन्होंने सोलर कार की तैयार की।
श्रीनगर के सनत नगर में रहने वाले बिलाल इस प्रोजेक्ट पर 11 साल से काम कर रहे थे। आज बिलाल इस कार को चलाते हैं। इस कार की सतह और दरवाजों पर सोलर पैनल लगे हैं। इसके दरवाजे ऊपर की तरफ फरारी की तरह खुलते हैं। इस कार को बनाने में 16 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसमें चार लोग बैठ सकते हैं।
बिलाल कहते हैं कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर उन्होंने सौर ऊर्जा से चलने वाली कार बनाने की सोची। 2019 में वह सोलर पैनल बनाने वाली चेन्नई की कंपनी में गए। इसके अलावा उन्होंने इस क्षेत्र के कई विशेषज्ञों के साथ शोध और विचार मंथन भी किया।
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बिलाल ने कहा कि उन्होंने 1950 के बाद बनी विभिन्न लग्जरी कारों के बारे में अध्ययन किया। उन्होंने डेलोरियन नाम के एक इंजीनियर और इनोवेटर के बारे में भी अध्ययन किया, जिन्होंने एक कंपनी डीएमसी शुरू की थी। डेलोरियन से वह प्रभावित हुए और एक ऐसी कार बनाने की प्रेरणा मिली जो आम लोगों के लिए शानदार और सस्ती हो। बिलाल ने कहा, मर्सिडीज, फरारी, बीएमडब्ल्यू जैसी कारें एक आम व्यक्ति के लिए सिर्फ सपना हैं। मैंने एक शानदार अनुभव देने के लिए आम लोगों के लिए भी कुछ सोचा।
बिलाला कहते हैं कि उन्होंने ऐसे सौर पैनलों का इस्तेमाल किया जो कम धूप के दिनों में भी उच्च दक्षता दे सकते हैं। सौर पैनल दो प्रकार के होते हैं मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन। बिलाल ने मोनोक्रिस्टलाइन सौर पैनलों का इस्तेमाल किया जो कम जगह घेरते थे और अधिक दक्षता देते थे।
उन्होंने कहा कि इस कार के सौर पैनल स्वचालित रूप से सूर्य की बदलती दिशाओं के साथ अपनी दिशा बदल सकते हैं। इसके लिए उन्होंने एक रिमोट कंट्रोल बनाया है जो 1.5 किलोमीटर के दायरे में काम करता है और पैनलों की दिशा को नियंत्रित कर सकता है ताकि उनके द्वारा अधिक प्रकाश अवशोषित किया जा सके। बिलाल ने कहा कि उन्होंने कार में लेड एसिड बैटरी का इस्तेमाल किया है।
एलपीजी गैस कंट्रोलिंग सेफ्टी डिवाइस भी बना चुके
बिलाल आईआईईडी केंद्र एनआईटी श्रीनगर से जुड़े एक नवप्रवर्तनक हैं। सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक होने के बावजूद उनकी इलेक्ट्रॉनिक्स में अच्छी रुचि है। उन्हें शिक्षण में 14 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने विभिन्न कॉलेजों और स्कूलों में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया है। इससे पहले उन्होंने 2009 में एलपीजी गैस कंट्रोलिंग सेफ्टी डिवाइस बनाया था। वह उपकरण जो मोबाइल एप के जरिए कहीं से भी एलपीजी सिलेंडर को अपने आप बंद कर सकता है।
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श्रीनगर के सनत नगर में रहने वाले बिलाल इस प्रोजेक्ट पर 11 साल से काम कर रहे थे। आज बिलाल इस कार को चलाते हैं। इस कार की सतह और दरवाजों पर सोलर पैनल लगे हैं। इसके दरवाजे ऊपर की तरफ फरारी की तरह खुलते हैं। इस कार को बनाने में 16 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसमें चार लोग बैठ सकते हैं।
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बिलाल कहते हैं कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर उन्होंने सौर ऊर्जा से चलने वाली कार बनाने की सोची। 2019 में वह सोलर पैनल बनाने वाली चेन्नई की कंपनी में गए। इसके अलावा उन्होंने इस क्षेत्र के कई विशेषज्ञों के साथ शोध और विचार मंथन भी किया।
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बिलाल ने कहा कि उन्होंने 1950 के बाद बनी विभिन्न लग्जरी कारों के बारे में अध्ययन किया। उन्होंने डेलोरियन नाम के एक इंजीनियर और इनोवेटर के बारे में भी अध्ययन किया, जिन्होंने एक कंपनी डीएमसी शुरू की थी। डेलोरियन से वह प्रभावित हुए और एक ऐसी कार बनाने की प्रेरणा मिली जो आम लोगों के लिए शानदार और सस्ती हो। बिलाल ने कहा, मर्सिडीज, फरारी, बीएमडब्ल्यू जैसी कारें एक आम व्यक्ति के लिए सिर्फ सपना हैं। मैंने एक शानदार अनुभव देने के लिए आम लोगों के लिए भी कुछ सोचा।
बिलाला कहते हैं कि उन्होंने ऐसे सौर पैनलों का इस्तेमाल किया जो कम धूप के दिनों में भी उच्च दक्षता दे सकते हैं। सौर पैनल दो प्रकार के होते हैं मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन। बिलाल ने मोनोक्रिस्टलाइन सौर पैनलों का इस्तेमाल किया जो कम जगह घेरते थे और अधिक दक्षता देते थे।
उन्होंने कहा कि इस कार के सौर पैनल स्वचालित रूप से सूर्य की बदलती दिशाओं के साथ अपनी दिशा बदल सकते हैं। इसके लिए उन्होंने एक रिमोट कंट्रोल बनाया है जो 1.5 किलोमीटर के दायरे में काम करता है और पैनलों की दिशा को नियंत्रित कर सकता है ताकि उनके द्वारा अधिक प्रकाश अवशोषित किया जा सके। बिलाल ने कहा कि उन्होंने कार में लेड एसिड बैटरी का इस्तेमाल किया है।
एलपीजी गैस कंट्रोलिंग सेफ्टी डिवाइस भी बना चुके
बिलाल आईआईईडी केंद्र एनआईटी श्रीनगर से जुड़े एक नवप्रवर्तनक हैं। सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक होने के बावजूद उनकी इलेक्ट्रॉनिक्स में अच्छी रुचि है। उन्हें शिक्षण में 14 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने विभिन्न कॉलेजों और स्कूलों में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया है। इससे पहले उन्होंने 2009 में एलपीजी गैस कंट्रोलिंग सेफ्टी डिवाइस बनाया था। वह उपकरण जो मोबाइल एप के जरिए कहीं से भी एलपीजी सिलेंडर को अपने आप बंद कर सकता है।