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शोपियां में आतंकियों की गोली के शिकार कश्मीरी पंडित के घर पड़ोसी मुस्लिमों ने डाला डेरा
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शोपियां। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में सोमवार को आतंकियों की गोली से घायल कश्मीरी पंडित दुकानदार और उसके परिवार को पड़ोसी मुस्लिमों का भरपूर समर्थन मिला है। घायल कश्मीरी पंडित को ले जाने के बाद उनकी मदद के लिए पड़ोसियों ने घर पर भी डेरा डाल दिया है।
जिले के चोटीगाम में एक दवा की दुकान चलाने वाले बाल कृष्ण भट को सोमवार शाम आतंकियों ने गोली मार दी थी। फिलहाल श्रीनगर में सेना के 92-बेस अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। भट परिवार शोपियां जिला मुख्यालय से लगभग 10 किमी और श्रीनगर से 70 किमी दूर चोटीगाम में रहने वाले दो कश्मीरी पंडित परिवारों में से एक है। यह क्षेत्र आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का गढ़ माना जाता है।
बाल कृष्ण के भाई 32 वर्षीय अनिल भट ने बताया कि हम यहां लंबे समय से रहे हैं और कभी भी इस जगह को नहीं छोड़ा। हमने कभी खतरा महसूस नहीं किया है। हम नहीं जानते कि इस हमले के क्या मायने हैं। हमारे सभी पड़ोसी बहुत अच्छे हैं, लेकिन हम बंदूक के खतरे का मुकाबला कैसे करेंगे। मेरे भाई के अस्पताल से लौटने के बाद ही हम अपने भविष्य के बारे में फैसला करेंगे। मंगलवार को बड़ी संख्या में उनके पड़ोसी भट परिवार से मिलने पहुंचे और उनके प्रति अपना समर्थन जताया।
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पड़ोसी मुख्तार अहमद लोन ने बताया कि जैसे ही मैंने गोलियों और रोने की आवाजें सुनीं, मैं अपने भतीजे और दोस्तों के साथ बाहर निकल आया। हम सोनू (बाल कृष्ण भट) को शोपियां ले गए। अब लोन और उसके पूरे परिवार ने भट परिवार के घर डेरा डाल दिया है। सोनू और मैं एक साथ बड़े हुए हैं और हमारे बीच बिल्कुल भी अंतर नहीं है। हम एक हैं और इंशा अल्लाह, हम हमेशा एक रहेंगे।
एक अन्य पड़ोसी फैयाज अहमद ने कहा कि सोनू को गांव में हर कोई पसंद करता है क्योंकि वह किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में लोगों की मदद के लिए आधी रात के बाद भी अपनी दुकान खोल देता है।
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मुस्लिमों ने कहा, घर न छोड़ें
बाल कृष्ण के पिता पंडित जानकी नाथ भट ने मंगलवार को उनके घर आए पड़ोसियों से बातचीत की। पड़ोसियों ने परिवार से घाटी न छोड़ने की गुहार लगाई। रसूल मीर ने भट के आवास पर कहा, कई लोग हैं जो चाहते हैं कि हम अलग-अलग दिशाओं में जाएं, लेकिन हम पूरी दृढ़ता के साथ यह कहें कि हम एक थे, हैं और रहेंगे।
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टीआरएफ ने ली घटना की जिम्मेदारी
इस बीच, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोमवार के हमले के बाद कश्मीरी पंडित परिवारों को सुरक्षा प्रदान की है, जिसके लिए प्रतिबंधित लश्कर-ए-ताइबा के छद्म संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है। पुलिस का कहना है कि हमने पहले ही अल्पसंख्यकों वाले कई गांवों में सुरक्षा प्रदान की है। हालांकि कुछ गांवों में अभी भी सुरक्षा नहीं है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाई गई है।
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आतंकियों पर काबू पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही पुलिस
पुलिस ने कहा कि पुलिस बल इस आतंकी-अपराध में शामिल आतंकवादियों को गिरफ्तार करने या उन्हें बेअसर करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है और कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई हमारी योजना के अनुसार चल रही है। इस तरह की घटनाएं आतंकवादियों खासकर सीमा पार से उनके आकाओं की हताशा हैं
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जिले के चोटीगाम में एक दवा की दुकान चलाने वाले बाल कृष्ण भट को सोमवार शाम आतंकियों ने गोली मार दी थी। फिलहाल श्रीनगर में सेना के 92-बेस अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। भट परिवार शोपियां जिला मुख्यालय से लगभग 10 किमी और श्रीनगर से 70 किमी दूर चोटीगाम में रहने वाले दो कश्मीरी पंडित परिवारों में से एक है। यह क्षेत्र आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का गढ़ माना जाता है।
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बाल कृष्ण के भाई 32 वर्षीय अनिल भट ने बताया कि हम यहां लंबे समय से रहे हैं और कभी भी इस जगह को नहीं छोड़ा। हमने कभी खतरा महसूस नहीं किया है। हम नहीं जानते कि इस हमले के क्या मायने हैं। हमारे सभी पड़ोसी बहुत अच्छे हैं, लेकिन हम बंदूक के खतरे का मुकाबला कैसे करेंगे। मेरे भाई के अस्पताल से लौटने के बाद ही हम अपने भविष्य के बारे में फैसला करेंगे। मंगलवार को बड़ी संख्या में उनके पड़ोसी भट परिवार से मिलने पहुंचे और उनके प्रति अपना समर्थन जताया।
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पड़ोसी मुख्तार अहमद लोन ने बताया कि जैसे ही मैंने गोलियों और रोने की आवाजें सुनीं, मैं अपने भतीजे और दोस्तों के साथ बाहर निकल आया। हम सोनू (बाल कृष्ण भट) को शोपियां ले गए। अब लोन और उसके पूरे परिवार ने भट परिवार के घर डेरा डाल दिया है। सोनू और मैं एक साथ बड़े हुए हैं और हमारे बीच बिल्कुल भी अंतर नहीं है। हम एक हैं और इंशा अल्लाह, हम हमेशा एक रहेंगे।
एक अन्य पड़ोसी फैयाज अहमद ने कहा कि सोनू को गांव में हर कोई पसंद करता है क्योंकि वह किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में लोगों की मदद के लिए आधी रात के बाद भी अपनी दुकान खोल देता है।
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मुस्लिमों ने कहा, घर न छोड़ें
बाल कृष्ण के पिता पंडित जानकी नाथ भट ने मंगलवार को उनके घर आए पड़ोसियों से बातचीत की। पड़ोसियों ने परिवार से घाटी न छोड़ने की गुहार लगाई। रसूल मीर ने भट के आवास पर कहा, कई लोग हैं जो चाहते हैं कि हम अलग-अलग दिशाओं में जाएं, लेकिन हम पूरी दृढ़ता के साथ यह कहें कि हम एक थे, हैं और रहेंगे।
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टीआरएफ ने ली घटना की जिम्मेदारी
इस बीच, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोमवार के हमले के बाद कश्मीरी पंडित परिवारों को सुरक्षा प्रदान की है, जिसके लिए प्रतिबंधित लश्कर-ए-ताइबा के छद्म संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है। पुलिस का कहना है कि हमने पहले ही अल्पसंख्यकों वाले कई गांवों में सुरक्षा प्रदान की है। हालांकि कुछ गांवों में अभी भी सुरक्षा नहीं है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाई गई है।
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आतंकियों पर काबू पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही पुलिस
पुलिस ने कहा कि पुलिस बल इस आतंकी-अपराध में शामिल आतंकवादियों को गिरफ्तार करने या उन्हें बेअसर करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है और कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई हमारी योजना के अनुसार चल रही है। इस तरह की घटनाएं आतंकवादियों खासकर सीमा पार से उनके आकाओं की हताशा हैं
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