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Srinagar News: एलजी मनोज सिन्हा ने लिविंग द गीता टुडे पुस्तक का किया विमोचन
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन श्रीनगर में रविवार को लिविंग द गीता टुडे नामक पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक के लेखक बीजीएसबीयू राजोरी की सहायक प्रोफेसर डॉ. शचि सूद, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू की प्रोफेसर वंदना शर्मा और केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनय कुमार हैं।
पुस्तक की प्रस्तावना भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री बीआर शंकरानंद जी ने लिखी है। प्रस्तावना में उन्होंने पुस्तक की विशिष्टता और इसके समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित किया है।
लिविंग द गीता टुडे में भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान की समकालीन संदर्भ में व्याख्या प्रस्तुत की गई है। पुस्तक में यह समझाने का प्रयास किया गया है कि गीता की शिक्षाएं आज के जीवन में सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों, जैसे आंतरिक संघर्ष, तनाव, नेतृत्व, जीवन के उद्देश्य, नैतिक जीवन और निर्णय लेने में किस प्रकार प्रासंगिक हो सकती हैं।
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पुस्तक को कुल 10 अध्यायों में विभाजित किया गया है, जिसमें भगवद्गीता के 90 चयनित श्लोकों पर चर्चा की गई है। लेखकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और उसके समकालीन महत्व के बीच एक सेतु स्थापित करने का प्रयास किया है।
पुस्तक में भगवद्गीता की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए धर्म, कर्मयोग, स्वधर्म, समत्व और करुणा जैसे सिद्धांतों की व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है। लेखकों का उद्देश्य गीता के दर्शन को केवल आध्यात्मिक संदर्भ तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन की परिस्थितियों में उसकी प्रासंगिकता को सामने लाना है।
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श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन श्रीनगर में रविवार को लिविंग द गीता टुडे नामक पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक के लेखक बीजीएसबीयू राजोरी की सहायक प्रोफेसर डॉ. शचि सूद, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू की प्रोफेसर वंदना शर्मा और केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनय कुमार हैं।
पुस्तक की प्रस्तावना भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री बीआर शंकरानंद जी ने लिखी है। प्रस्तावना में उन्होंने पुस्तक की विशिष्टता और इसके समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित किया है।
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लिविंग द गीता टुडे में भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान की समकालीन संदर्भ में व्याख्या प्रस्तुत की गई है। पुस्तक में यह समझाने का प्रयास किया गया है कि गीता की शिक्षाएं आज के जीवन में सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों, जैसे आंतरिक संघर्ष, तनाव, नेतृत्व, जीवन के उद्देश्य, नैतिक जीवन और निर्णय लेने में किस प्रकार प्रासंगिक हो सकती हैं।
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पुस्तक को कुल 10 अध्यायों में विभाजित किया गया है, जिसमें भगवद्गीता के 90 चयनित श्लोकों पर चर्चा की गई है। लेखकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और उसके समकालीन महत्व के बीच एक सेतु स्थापित करने का प्रयास किया है।
पुस्तक में भगवद्गीता की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए धर्म, कर्मयोग, स्वधर्म, समत्व और करुणा जैसे सिद्धांतों की व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है। लेखकों का उद्देश्य गीता के दर्शन को केवल आध्यात्मिक संदर्भ तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन की परिस्थितियों में उसकी प्रासंगिकता को सामने लाना है।