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नकेल: कश्मीर के बर्फीले इलाके में सेना, वायु सेना व नौ सेना का पहली बार संयुक्त अभ्यास, घुसपैठ रोकने के लिए ऑपरेशनल तैयारी शुरू

Wed, 08 Dec 2021 12:37 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 08 Dec 2021 12:37 AM IST
सार

प्रशिक्षण अभ्यास में सेना और वायुसेना के एमआई 17 और एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टर के अलावा एएच 64ई अपाचे लड़ाकू विमान भी शामिल हुए। एमआई 17 और एएलएच ध्रुव से जवानों को 9,000 फुट की ऊंचाई से बर्फीले मैदान में उतारा गया।

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for the first time joint exercise of army air force and navy in the snowy area of kashmir
घुसपैठ को रोकने के लिए तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल तैयारी शुरू - फोटो : amar ujala

विस्तार

घाटी में बर्फबारी के साथ ही सेना ने सर्दियों में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर चुनौतियों को देखते हुए ऑपरेशनल तैयारी शुरू कर दी है। सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों ने पहली बार संयुक्त तौर पर इस तरह के प्रशिक्षण में भाग लिया। तीनों सेनाओं के जांबाजों ने दुर्गम हालातों में दुश्मन से निपटने के लिए अभ्यास किया। इस प्रशिक्षण अभियान का आयोजन उत्तरी कश्मीर में एलओसी से सटे इलाके में किया गया। वहां आम तौर पर बीस फुट से अधिक बर्फ और पारा माइनस 25 डिग्री के नीचे रहता है।

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खुफिया एजेंसियों ने एलओसी पर बर्फबारी के दौरान घुसपैठ को लेकर अलर्ट जारी किया है। इसी के चलते सरहदी इलाकों में खास अभ्यास का आयोजन किया गया। सेना के हाई एल्टीट्यूट वारफेयर स्कूल के साथ वायुसेना और नौसेना के मारकोस कमांडो भी इसमें शामिल हुए। पहली बार समुद्र में तैनात रहने वाले नौसेना के कमांडो भी एलओसी के करीब दुर्गम पहाड़ों में हुए इस ऑपरेशन में शामिल हुए। 
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जवानों को 9,000 फुट की ऊंचाई से बर्फीले मैदान में उतारा 
प्रशिक्षण अभ्यास में सेना और वायुसेना के एमआई 17 और एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टर के अलावा एएच 64ई अपाचे लड़ाकू विमान भी शामिल हुए। एमआई 17 और एएलएच ध्रुव से जवानों को 9,000 फुट की ऊंचाई से बर्फीले मैदान में उतारा गया। इस दौरान ऐसे हालात को दर्शाने की कोशिश की गई जैसा एलओसी पर होते हैं। आने वाले दिनों में ऐसे अभ्यास जारी रहेंगे।
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एलएसी पर भी ऐसे ऑपरेशन की पड़ सकती है जरूरत  
एलओसी से घुसपैठ कर आतंकी छोटे गांवों में छिप जाते हैं। इन गांवों में सड़क से पहुंचना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में इन इलाकों में पैरा कमांडो को उतारा जाता है। जहां वह पूरे ऑपरेशन को अंजाम दे सकें। इसी तरह के ऑपरेशन का प्रशिक्षण अभियान बर्फीली वादियों में हुआ। सेना ने बताया कि जवानों को सभी तरह के हालात में लड़ने के लिए तैयार करना इस ट्रेनिंग का मकसद था। केवल कश्मीर घाटी ही नहीं बल्कि चीन के साथ लगने वाली एलएसी पर भी ऐसे ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है।


कश्मीर में वायुसेना, नौसेना और थलसेना का संयुक्त अभ्यास था। यह आयोजन हवाई रक्षा क्षमता और अन्य क्षमताओं को जांचने तथा सेना की तीनों शाखाओं के बीच तालमेल को परखने के लिए किया गया था। इस संयुक्त अभ्यास से यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हमारी क्षमताएं सही हैं। -लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे, जीओसी-चिनार कोर

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