JKCA Money Laundering: फारूक अब्दुल्ला समेत अन्य आरोपियों को कोर्ट का समन, 27 अगस्त को किया तलब
श्रीनगर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेकेसीए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फारूक अब्दुल्ला समेत अन्य आरोपियों को समन भेजा है। कोर्ट ने नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष समेत अन्य आरोपियों को 27 अगस्त को तलब किया है।
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जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में श्रीनगर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष, सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला समेत अन्य आरोपियों को समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज शिकायत में फारूक अब्दुल्ला समेत अन्य आरोपी बनाए गए हैं।
ईडी का दावा है कि जेकेसीए के तत्कालीन पदाधिकारी एहसान अहमद मिर्जा ने अन्य आरोपी सलीम खान (पूर्व महा सचिव), मीर मंजूर गजनफर, गुलजार अहमद (पूर्व अकाउंटेंट जेकेसीए), बशीर अहमद मिसगर (जेके बैंक एक्जीक्यूटिव) और डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ मिलकर जेकेसीए के खाते से 51.90 करोड़ रुपये निकलवा लिए। प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश ने फारूक समेत अन्य आरोपियों को 27 अगस्त को तलब किया है। ईडी ने इसी मामले में फारूक अब्दुल्ला से 31 मई को तीन घंटे पूछताछ की थी।
जेकेसीए में वर्ष 2004 से लेकर 2009 के बीच की अवधि में पैसों के गड़बड़झाले की सीबीआई और ईडी जांच कर रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला वर्ष 2001 से लेकर 2012 तक जेकेसीए के अध्यक्ष रहे थे।
अब तक की जांच में ईडी की ओर से फारूक अब्दुल्ला की 11.86 करोड़ की अचल संपत्ति समेत कुल 21 करोड़ की संपत्ति को अटैच किया जा चुका है। ईडी ने जांच में खुलासा किया है कि एहसान अहमद मिर्जा ने जेकेसीए के अन्य पदाधिकारियों की मिलीभगत से 51.90 करोड़ रुपये का अपने व्यक्तिगत हितों और कारोबारी देनदारी चुकाने के लिए इस्तेमाल किया। ईडी के अनुसार, मिर्जा ने जेकेसीए का पैसा निकलवाकर अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को थमाया। मिर्जा ने अपने घर पर ही जेकेसीए का बही खाता तैयार किया और लेन-देन के रिकॉर्ड को ऑडिटर और जेकेसीए की कार्यकारी समिति से छिपाया। श्रीनगर के रामबाग मुंशी थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की थी। बाद में इस मामले को हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई के हवाले कर दिया गया।
नियमों के विपरीत फारूक ने मिर्जा को बनाया कोषाध्यक्ष
ईडी के अनुसार जेकेसीए में एहसान अहमद मिर्जा को फारूक अब्दुल्ला ने कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था जबकि इस पद के लिए कार्यकारी समिति की सदस्यता में चयनित होना अनिवार्य होता है। ईडी ने कहा है कि मिर्जा की नियुक्ति असल में यह सुनिश्चित करने के लिए की गई कि वित्त मामले मिर्जा के ही नियंत्रण में रहें। बाद में मिर्जा को वित्त समिति का सदस्य बना दिया गया, जो कि पूरी तरह से नियमों के विपरीत था। यही नहीं मिर्जा ने बीसीसीआई से मिली धनराशि को अपने खाते में ट्रांसफर करवाया और फिर इस पैसे का इस्तेमाल अपने निजी स्वार्थ और कारोबारी देनदारी चुकाने के लिए किया।
मीर ने समिति से छिपाई वित्तीय अनियमितता
ईडी का कहना है कि मीर मंजूर गजनफर के पास जेकेसीए की कार्यकारी समिति की सदस्यता थी और जेकेसीए का पदाधिकारी होने के बावजूद मीर ने मिर्जा के साथ अपना नाम भी बैंक खाते में शामिल करवाया। यह कदम भी जेकेसीए नियमों के विपरीत था। मीर ने दावा किया था कि वित्तीय मामलों में अनियमितता पाए जाने उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को पत्र के जरिए सूचित किया था, लेकिन चुने हुए कोषाध्यक्ष होने के बावजूद वे इस मामले को कार्यकारी समिति के संज्ञान में नहीं लाए। यही नहीं, मीर ने जेकेसीए के खाते से 7.11 करोड़ रुपये संयुक्त खाते में ट्रांसफर करवाए