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बड़ा बदलाव: श्रीनगर के लाल चौक पर भगवान हनुमान की आरती, किष्किंधा से पहुंची अखिल भारतीय जन्मभूमि रथयात्रा
Thu, 19 Oct 2023 12:40 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 19 Oct 2023 12:40 PM IST
सार
कर्नाटक के किष्किंधा से पहुंची अखिल भारतीय जन्मभूमि रथयात्रा का यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान भगवान हनुमान की आरती विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।
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श्रीनगर
- फोटो : बासित जरगर
विस्तार
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए के निरस्त होने के बाद से विशेष रूप से कश्मीर घाटी में प्रतिदिन बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लाल चौक के मशहूर घंटाघर की तस्वीर भी बदली है। अब यह स्थान बड़े सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र बन गया है, जिसमें हर कोई शामिल होना चाहता है। बुधवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा था।
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कर्नाटक के किष्किंधा से पहुंची अखिल भारतीय जन्मभूमि रथयात्रा का यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान भगवान हनुमान की आरती विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। इस दौरान लाल चौक का इलाका जयकारों से गूंजता रहा।
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कर्नाटक में किष्किंधा को भगवान हनुमान का जन्मस्थान कहा जाता है। यह यात्रा हम्पी के स्वामी गोविंदानंद सरस्वती की देखरेख में निकाली जा रही है। स्वामी गोविंदानंद मंगलवार को रथयात्रा के दौरान अपने अनुयायियों के साथ कुपवाड़ा जिले के टीटवाल गांव पहुंचे थे। वहीं बुधवार को घंटाघर पर पहुंचने पर हनुमान जी की आरती की गई।
गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि कश्मीर में उन्हें लोगों से काफी सम्मान मिला है। उन्होंने देश के लोगों से अपील की कि वह कश्मीर घूमने के लिए आएं। यह बेहद खूबसूरत है। यह रथ यात्रा हनुमान मंदिर श्रीनगर, ज़ेस्टा देवी मंदिर श्रीनगर के साथ-साथ खीर भवानी मंदिर गांदरबल में पहुंचेगी। इसके बाद वैष्णो देवी(कटड़ा) के लिए रवाना होगी।
कर्नाटक में भगवान हनुमान के जन्मस्थान से शुरू हुई है यात्रा
यह यात्रा कर्नाटक में भगवान हनुमान के जन्मस्थान से शुरू हुई। इसका उद्देश्य देश में घूम-घूमकर सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना है और लोगों को भक्ति मार्ग पर एकजुट करना है। जैसे अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा है, वैसे ही कर्नाटक के किष्किंधा में भव्य मंदिर बन रहा है। स्वामी गोविंदानंद ने कहा कि हम इस क्षेत्र के लोगों का किष्किंधा में स्वागत करने के लिए कश्मीर आए हैं। आजादी के बाद पहली बार एलओसी के पास टीटवाल गांव में शारदा देवी मंदिर में भी नवरात्र पूजा आयोजित की गई।