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आलोचनाओं के बाद हीटिंग व्यवस्था का आदेश वापस
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श्रीनगर। आलोचनाओं के बाद गांदरबल जिला प्रशासन ने हीटिंग व्यवस्था को लेकर जारी किए आदेश को वापस ले लिया है। इससे पहले प्रशासन ने बिजली के हीटिंग उपकरणों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह निर्देश तब जारी हुआ था, जब जिले के ऊपरी इलाके हिमपात के बाद ठंड से जूझ रहे हैं।
डीसी श्यामवीर के आदेश में हीटिंग उपकरण जैसे ब्लोअर, हीटर रेडिएटर आदि पर 1973 की सीआरपीसी की धारा 144 के अंतर्गत उन्होंने जिले में ब्लोअर जैसे भारी ताप उपकरणों के भंडारण, बिक्री, कब्जे और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश की राजनीतिक दलों और संगठनों ने आलोचना की है। पीडीपी प्रवक्ता मोहित बहन ने आदेश को लेकर ट्वीट किया कि क्या हम देश के गर्म इलाकों में कहीं भी इस तरह के आदेश जारी करते हैं कि चरम गर्मियों के दौरान एयर कंडीश्नर का उपयोग न करें? कोई व्यक्ति जो उस स्थान के परिदृश्य और भूगोल को नहीं समझता, केवल वही इस तरह के आदेश जारी कर सकता है।
पीडीपी अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती के मीडिया सलाहकार सुहेल बुखारी ने भी ट्वीट में लिखा कि भाजपा का सुशासन मॉडल और नया कश्मीर आपके लिए। एक ऐसी जगह पर बिजली का हीटर रखना अपराध हो गया, जहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। देश में कहीं और इस तरह के आदेश की कल्पना करें, तो एसी, हीटर या पंखे का उपयोग करना अपराध है। क्या डीसी गांदरबल जानते हैं कि सोनमर्ग, आदि स्थान गांदरबल जिले का हिस्सा हैं?
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और भाजपा नेता खालिद जहांगीर ने भी इस आदेश की आलोचना की। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर इस आदेश को हास्यास्पद बताया। लिखा कि प्रशासन बिजली के हीटरों की बिक्री, उपयोग और यहां तक कि भंडारण पर भी पूर्ण प्रतिबंध कैसे लगा सकता है? क्या डीसी का हीटिंग/कूलिंग एसी धारा 144 प्रतिबंध के अंतर्गत आता है? क्या वह इसे अपने कार्यालय/घर से हटा देंगे? क्या लोगों को मौत के घाट उतार देना चाहिए? धारा 144 के आदेशों का उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी होती है। क्या यह बेरहम प्रशासन उन माता-पिता को गिरफ्तार करने जा रहा है जो अपने बच्चों को ठंड से मरने से बचाना चाहते हैं? या बच्चे जो वृद्ध माता-पिता को ठंड से बचाना चाहते हैं? इस कठोर आदेश को वापस लिया जाना चाहिए।
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डीसी श्यामवीर के आदेश में हीटिंग उपकरण जैसे ब्लोअर, हीटर रेडिएटर आदि पर 1973 की सीआरपीसी की धारा 144 के अंतर्गत उन्होंने जिले में ब्लोअर जैसे भारी ताप उपकरणों के भंडारण, बिक्री, कब्जे और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश की राजनीतिक दलों और संगठनों ने आलोचना की है। पीडीपी प्रवक्ता मोहित बहन ने आदेश को लेकर ट्वीट किया कि क्या हम देश के गर्म इलाकों में कहीं भी इस तरह के आदेश जारी करते हैं कि चरम गर्मियों के दौरान एयर कंडीश्नर का उपयोग न करें? कोई व्यक्ति जो उस स्थान के परिदृश्य और भूगोल को नहीं समझता, केवल वही इस तरह के आदेश जारी कर सकता है।
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पीडीपी अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती के मीडिया सलाहकार सुहेल बुखारी ने भी ट्वीट में लिखा कि भाजपा का सुशासन मॉडल और नया कश्मीर आपके लिए। एक ऐसी जगह पर बिजली का हीटर रखना अपराध हो गया, जहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। देश में कहीं और इस तरह के आदेश की कल्पना करें, तो एसी, हीटर या पंखे का उपयोग करना अपराध है। क्या डीसी गांदरबल जानते हैं कि सोनमर्ग, आदि स्थान गांदरबल जिले का हिस्सा हैं?
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और भाजपा नेता खालिद जहांगीर ने भी इस आदेश की आलोचना की। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर इस आदेश को हास्यास्पद बताया। लिखा कि प्रशासन बिजली के हीटरों की बिक्री, उपयोग और यहां तक कि भंडारण पर भी पूर्ण प्रतिबंध कैसे लगा सकता है? क्या डीसी का हीटिंग/कूलिंग एसी धारा 144 प्रतिबंध के अंतर्गत आता है? क्या वह इसे अपने कार्यालय/घर से हटा देंगे? क्या लोगों को मौत के घाट उतार देना चाहिए? धारा 144 के आदेशों का उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी होती है। क्या यह बेरहम प्रशासन उन माता-पिता को गिरफ्तार करने जा रहा है जो अपने बच्चों को ठंड से मरने से बचाना चाहते हैं? या बच्चे जो वृद्ध माता-पिता को ठंड से बचाना चाहते हैं? इस कठोर आदेश को वापस लिया जाना चाहिए।