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डीडीसी राजोरी ने जिले में बाल संरक्षण कानूनों के कार्यान्वयन की समीक्षा की
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डीसी राजोरी बाल संरक्षण को लेकर बैठक करते हुए
राजोरी। उपायुक्त राजेश कुमार शवन ने शुक्रवार को बाल संरक्षण कानूनों के संबंध में बैठक कर समीक्षा की। उन्होंने 14 साल से कम उम्र के बच्चों को घरेलू कामकाज के लिए नौकर न रखने के निर्देश दिए। बैठक में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) और जिला बाल संरक्षण इकाई के कामकाज पर बातचीत की।
बैठक में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जेजेबी रियाज अहमद चौधरी, जिला लीगल सर्विस अथॉरिटी के सचिव सुरिंदर कुमार थापा और अभियोजन इकाई के अधिकारी भी शामिल हुए। शुरुआत में, कानूनी सह परिवीक्षा अधिकारी शिवांगी कांत सूदन ने संबंधित इकाइयों और अब तक की उपलब्धियों के बारे में अवगत कराया। बैठक में जिले में भिखारियों की बढ़ती तादाद, स्लम क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र, बाल विवाह और अन्य बच्चों से संबंधित मुद्दे पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने इकाइयों को निकट काम करने और अन्य विभागों को किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने में उनकी भूमिका से अवगत कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह सीडब्ल्यूसी की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने वाले मामलों का निरंतर पालन करे।
उपायुक्त ने कहा कि जेजेबी, सीडब्ल्यूसी के बारे में सम्मेलन, सेमिनार और अन्य माध्यमों से छात्रों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि लक्षित समूहों को संवेदनशील बनाया जा सके।
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बैठक में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जेजेबी रियाज अहमद चौधरी, जिला लीगल सर्विस अथॉरिटी के सचिव सुरिंदर कुमार थापा और अभियोजन इकाई के अधिकारी भी शामिल हुए। शुरुआत में, कानूनी सह परिवीक्षा अधिकारी शिवांगी कांत सूदन ने संबंधित इकाइयों और अब तक की उपलब्धियों के बारे में अवगत कराया। बैठक में जिले में भिखारियों की बढ़ती तादाद, स्लम क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र, बाल विवाह और अन्य बच्चों से संबंधित मुद्दे पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने इकाइयों को निकट काम करने और अन्य विभागों को किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने में उनकी भूमिका से अवगत कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह सीडब्ल्यूसी की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने वाले मामलों का निरंतर पालन करे।
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उपायुक्त ने कहा कि जेजेबी, सीडब्ल्यूसी के बारे में सम्मेलन, सेमिनार और अन्य माध्यमों से छात्रों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि लक्षित समूहों को संवेदनशील बनाया जा सके।
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