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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Petition dismissed land of Kashmiri Pandits to be government land scheme started to get property back

कश्मीरी पंडितों का मामला : कश्मीरी पंडितों की जमीन को सरकारी जमीन बताने वाली याचिका खारिज, संपत्ति वापस दिलवाने के लिए योजना शुरू

Thu, 03 Mar 2022 11:00 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
अमर उजाला संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 03 Mar 2022 11:00 PM IST
सार

न्यायमूर्ति धीरज सिंह ठाकुर की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद गुरुवार (वीरवार) को कहा कि याचिकाकर्ता इम्तियाज अहमद शाह और अन्य विस्थापित कश्मीरी पंडितों को उनकी भूमि सौंपे जाने की प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं। इसलिए उन पर एक लाख का आर्थिक दंड लगाया जाता है। इसमें दस-दस हजार रुपये भूमि के स्वामित्व का आवेदन करे वाले विस्थापित कश्मीरी पंडितों गौतम बाली और सुमित बाली को मिलेंगे जबकि शेष 80 हजार रुपये अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा किए जाएंगे। 

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Petition dismissed land of Kashmiri Pandits to be government land scheme started to get property back
सांकेतिक फोटो - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में कश्मीरी पंडितों की जमीन को शामलात (सरकारी) जमीन बताने वाली एक याचिका को खारिज करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं पर एक लाख का जुर्माना लगाया है। 

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न्यायमूर्ति धीरज सिंह ठाकुर की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद गुरुवार (वीरवार) को कहा कि याचिकाकर्ता इम्तियाज अहमद शाह और अन्य विस्थापित कश्मीरी पंडितों को उनकी भूमि सौंपे जाने की प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं। इसलिए उन पर एक लाख का आर्थिक दंड लगाया जाता है। इसमें दस-दस हजार रुपये भूमि के स्वामित्व का आवेदन करे वाले विस्थापित कश्मीरी पंडितों गौतम बाली और सुमित बाली को मिलेंगे जबकि शेष 80 हजार रुपये अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा किए जाएंगे। 
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घाटी छोड़ कर जा चुके पंडितों को संपत्ति वापस दिलवाने के लिए योजना शुरू
सरकार द्वारा घाटी छोड़ कर जा चुके कश्मीरी पंडितों को उनकी संपत्ति वापस दिलवाने के लिए योजना शुरू की है। इसके तहत गौतम बाली और सुमीत बाली ने अनंतनाग उपायुक्त को एक आवेदन सौंप कर पहलगाम तहसील में सर्वे नंबर 309 के तहत आने वाली 7 कनाल 3 मरला की भूमि पर अपना दावा जताया था।
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इस बीच इम्तियाज अहमद शाह और अन्य ने दावा किया कि उक्त जमीन शामलात जमीन है और उन्होंने शामलात अधिकारों के साथ उसे खरीदा गया है। उपायुक्त ने पहलगाम तहसीलदार को मामले की जांच करने को कहा। डीसी को सौंपी अपनी रिपोर्ट में तहसीलदार ने बताया कि सर्वे नं 309 में शामलात भूमि का कोई भी हिस्सा शामिल नहीं है।


अदालत ने सुनवाई में यह कहा
अदालत ने सुनवाई के बाद कहा कि तहसीलदार की रिपोर्ट बताती है कि विस्थापितों की जमीन पर इम्तियाज और उन्य लोगों ने जनरेटर लगा रखा है साथ ही कुछ झोपड़ियां भी बना रखी हैं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता स्वयं आश्वस्त नहीं हैं कि शामलात भूमि वास्तव में (उनके द्वारा खरीदी गई भूमि) के अंतर्गत आती है या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने अपनी जमीन पर कुछ झोपड़ियां बना रखी हैं और शायद उसका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में याचिकाकर्ताओं का इरादा प्रवासियों की भूमि का अतिक्रमण करना प्रतीत होता है। अदालत की आड़ में याचिकाकर्ता प्रशासन को विस्थापितों की संपत्ति की रक्षा करने के काम से रोक रहे हैं। साथ ही कहा कि इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है। साथ ही एक लाख रुपये के जुर्माने की राशि को वीरवार से एक माह के अंदर न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा कराना है।

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