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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   Organic walnut harvest begins in Kathua's Bani hills; farmers draw inspiration from PM's 'Mann Ki Baat' Kathua

Kathua: बनी की पहाड़ियों में शुरू हुई अखरोट की तुड़ाई, किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक

Sun, 30 Aug 2026 11:46 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ
अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 30 Aug 2026 11:46 AM IST
सार

कठुआ के बनी क्षेत्र में अखरोट की तुड़ाई शुरू हो गई है, जहां करीब 3,000 परिवारों की आजीविका इस खेती पर निर्भर है।पारंपरिक तरीके से उगाए गए अखरोट को धूप में सुखाकर बाजार में भेजा जा रहा है।

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Organic walnut harvest begins in Kathua's Bani hills; farmers draw inspiration from PM's 'Mann Ki Baat' Kathua
अखरोट की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी क्षेत्र बनी में अखरोट की तुड़ाई का मौसम शुरू हो गया है। किसान और उनके परिवार इन दिनों बागों में पेड़ों से पके अखरोट तोड़ने में व्यस्त हैं। पारंपरिक तरीके से उगाए जाने वाले इन अखरोटों को किसान प्राकृतिक खेती का उत्पाद मानते हैं।

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5-6 दिन धूप में सुखाने के बाद बाजार में बिक्री
पेड़ों से अखरोट तोड़ने के बाद उनकी अच्छी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद उन्हें करीब पांच से छह दिन तक धूप में सुखाया जाता है और फिर बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है। किसानों के लिए अखरोट सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत और उनकी आय का अहम जरिया है।

30 साल से बागवानी कर रहे मदन लाल
बनी के किसान मदन लाल करीब 30 वर्षों से बागवानी से जुड़े हैं। उनके पास लगभग 100 अखरोट के पेड़ हैं, जिनमें मुख्य रूप से हमदान और सुलेमान किस्में शामिल हैं। उनके अनुसार, एक साल में उत्पादन कई बार करीब 50 हजार अखरोट तक पहुंच जाता है। अखरोट की खेती लंबे समय से उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत रही है।

मदन लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब किसानों और बागवानी का जिक्र करते हैं तो उन्हें काफी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि मन की बात में किसानों और बागवानी को लेकर प्रधानमंत्री के विचारों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सालभर रहता है अखरोट की फसल का इंतजार
एक अन्य किसान आदिल ने बताया कि उन्हें पूरे साल अखरोट के पकने और तुड़ाई के मौसम का इंतजार रहता है। उन्होंने कहा कि फसल तैयार होने के बाद पेड़ों के नीचे खड़े होकर अखरोट की उपज देखना उनके लिए गर्व और खुशी का पल होता है। उनके लिए यह सिर्फ फसल नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत और जमीन से जुड़ाव का प्रतीक है।

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3 हजार परिवार अखरोट उत्पादन पर निर्भर
जिला बागवानी अधिकारी मोहम्मद शकील के मुताबिक, बनी क्षेत्र में करीब 3,000 परिवार अखरोट उत्पादन से जुड़े हैं और उनकी आजीविका काफी हद तक इसी खेती पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि बाजार में एक अखरोट की कीमत करीब तीन रुपये तक रहती है, जबकि अखरोट का पौधा फल देने लायक बनने में काफी समय लेता है। शकील के अनुसार, जब पेड़ पूरी तरह उत्पादन देने लगता है तो एक सीजन में इससे करीब 15,000 से 20,000 रुपये तक की आमदनी हो सकती है।

चैंडलर किस्म पर भी विभाग का जोर
जिला बागवानी अधिकारी ने कहा कि बनी क्षेत्र में अखरोट की खेती की काफी संभावनाएं हैं और विभाग किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार काम कर रहा है। पिछले दो वर्षों से विभाग चैंडलर किस्म के अखरोट पर भी काम कर रहा है। इसे प्रीमियम गुणवत्ता वाली किस्म बताया गया है और भविष्य में क्षेत्र के किसानों के लिए इसमें अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं।

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