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Kathua News: श्रद्धालुओं को प्रभु से प्रीत करने का दिया ज्ञान
Mon, 28 Apr 2025 01:17 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 28 Apr 2025 01:17 AM IST
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ब्राह्मण सभा में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : kathua
ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद्भागवत कथा जारी
कठुआ। शहर के ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। रविवार को कथाव्यास कुलदीप शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं वर्णन किया। वहीं श्रद्धालुओं को प्रभु से प्रीत करने का ज्ञान दिया।
उन्होंने कहा कि जब हम निश्चल भाव से प्रभु से प्रीत लगाते हैं, तो हमें उन्हीं का सानिध्य प्राप्त होता है, जो हमारे जीवन को सार्थक बना सकता है। कथाव्यास ने कहा कि जब भगवान ने गोकुल से प्रस्थान किया तो गोपियों ने उनका मार्ग रोक लिया। मगर जब उन्हें भगवान के स्वयं मथुरा जाने के निर्णय का पता चला तो उन्होंने मार्ग छोड़ दिया। यह उनके सच्चे प्रेम का सबूत है, क्योंकि प्रियतम के सुख को ही अपना सुख मानना सच्चा प्रेम है। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर धर्म की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा पुराण भक्ति ज्ञान वैराग्य और त्याग का नमूना है, जो हमारे इस लोक के जीवन के साथ-साथ परलोक की भी मंगल बनाने वाला है। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से जीव धन्य हो जाता है।
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कठुआ। शहर के ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। रविवार को कथाव्यास कुलदीप शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं वर्णन किया। वहीं श्रद्धालुओं को प्रभु से प्रीत करने का ज्ञान दिया।
उन्होंने कहा कि जब हम निश्चल भाव से प्रभु से प्रीत लगाते हैं, तो हमें उन्हीं का सानिध्य प्राप्त होता है, जो हमारे जीवन को सार्थक बना सकता है। कथाव्यास ने कहा कि जब भगवान ने गोकुल से प्रस्थान किया तो गोपियों ने उनका मार्ग रोक लिया। मगर जब उन्हें भगवान के स्वयं मथुरा जाने के निर्णय का पता चला तो उन्होंने मार्ग छोड़ दिया। यह उनके सच्चे प्रेम का सबूत है, क्योंकि प्रियतम के सुख को ही अपना सुख मानना सच्चा प्रेम है। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर धर्म की रक्षा की।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा पुराण भक्ति ज्ञान वैराग्य और त्याग का नमूना है, जो हमारे इस लोक के जीवन के साथ-साथ परलोक की भी मंगल बनाने वाला है। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से जीव धन्य हो जाता है।
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