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Kathua News: शौक से शुरू हुआ सफर, व्हीट स्ट्रॉ हस्तकला ने बनाया आत्मनिर्भर
Wed, 08 Oct 2025 12:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 08 Oct 2025 12:45 AM IST
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खुद तैयार किए गए उत्पाद बतातीं गीता देवी
दर्जनों महिलाओं को मिला हुनर, गीता देवी की कला बढ़ा रही घरों की सुंदरता
सरकंडे से बना रहीं ट्रे, टोकरी, हॉट केस और अन्य साजो सामान
कठुआ। चीड़ के पत्तों और जंगली घास सरपत, कुश व कास (खड़ या सरकंडा) से बनने उत्पादों की पारंपरिक हस्तकला को गीता देवी आज भी जिंदा रखे हुए हैं। इसी सरकंडे से बनने वाली ट्रे, टोकरी, हॉट केस और अन्य साजो सामान न केवल रसोई घरों व शोकेस की सुंदरता बढ़ा रही है बल्कि इससे अपनी और अपनी जैसी अन्य महिलाओं की कला को संभार कर इससे आत्मनिर्भरता की सीढ़ी भी बनाने में लगी हुई है।
शहर की रामनगर कॉलोनी की गीता देवी ने कभी शौक के लिए बुजुर्गों से सीखी पारंपरिक हस्तकला दर्जनों को प्रेरित कर रही है। व्हीट स्ट्रॉ हस्तकला से तैयार दर्जनों तरह के उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ती जा रही है और ग्राहकों को आकर्षित भी कर रही है। गीता देवी का कहना है कि हालांकि सरकंडा और चीड़ के पत्तों से तैयार उत्पादों की बेचने के लिए मुख्य बाजार आज हस्तशिल्प विभाग की ओर से आयोजित की जाने वाली प्रदर्शनियां ही हैं जहां अच्छी खासी आमदनी हो जाती है। यह उत्पाद सस्ते होते हैं जिनकी कीमत 200 रुपये से शुरू होकर ज्यादा से ज्यादा बड़ी टोकरी व हॉट केस 500 रुपये में मिल जाता है। इसके चलते शहरी महिलाएं शोकेस में विभिन्न सामानों को रखने के लिए इन उत्पादों को खरीदती है। इसके अलावा इसका बड़ा बाजार सालभर में तीन दिनों तक चलने वाले छठ पूजा के दौरान भी महिलाएं इसको बड़ी मात्रा में खरीदारी करती है। गीता देवी बताती है कि अगर कोई महिला मेहनत से काम करे तो एक महीने में एक से दो दर्जन उत्पाद बना देती है। इससे उनकी प्रति माह आमदनी पांच से आठ हजार के बीच हो जाती है। इससे सरकंडा शहर के आसपास मिलना थोड़ा मुश्किल हो रहा है।
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कला को बचाने के हरसंभव प्रयास कर रहा हस्तशिल्प विभाग
हस्तशिल्प विभाग के अधिकारियों ने ही उन्हें वीट स्ट्रॉ मल्टीक्राफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी बनाने के लिए प्रेरित कर दर्जनों महिलाओं को इस कला से जोड़ने की मदद की। विभाग कच्चा माल उपलब्ध करवाकर आर्डर पर सामान को तैयार करवाता है। इससे काफी मदद मिलती है। बाकी दिनों में सोसायटी से जुड़ी महिलाएं उत्पाद तैयार कर रामनगर कॉलोनी स्थित दुकान पर सालभर बिक्री करती हैं। गीता देवी का कहना है कि यह विभाग के प्रचार का ही नतीजा है कि छठ पूजा से जुड़े शहर के आसपास के सैकड़ों लोग दुकान से पूजा का सामान खरीदने के लिए आते हैं। संवाद
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सरकंडे से बना रहीं ट्रे, टोकरी, हॉट केस और अन्य साजो सामान
कठुआ। चीड़ के पत्तों और जंगली घास सरपत, कुश व कास (खड़ या सरकंडा) से बनने उत्पादों की पारंपरिक हस्तकला को गीता देवी आज भी जिंदा रखे हुए हैं। इसी सरकंडे से बनने वाली ट्रे, टोकरी, हॉट केस और अन्य साजो सामान न केवल रसोई घरों व शोकेस की सुंदरता बढ़ा रही है बल्कि इससे अपनी और अपनी जैसी अन्य महिलाओं की कला को संभार कर इससे आत्मनिर्भरता की सीढ़ी भी बनाने में लगी हुई है।
शहर की रामनगर कॉलोनी की गीता देवी ने कभी शौक के लिए बुजुर्गों से सीखी पारंपरिक हस्तकला दर्जनों को प्रेरित कर रही है। व्हीट स्ट्रॉ हस्तकला से तैयार दर्जनों तरह के उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ती जा रही है और ग्राहकों को आकर्षित भी कर रही है। गीता देवी का कहना है कि हालांकि सरकंडा और चीड़ के पत्तों से तैयार उत्पादों की बेचने के लिए मुख्य बाजार आज हस्तशिल्प विभाग की ओर से आयोजित की जाने वाली प्रदर्शनियां ही हैं जहां अच्छी खासी आमदनी हो जाती है। यह उत्पाद सस्ते होते हैं जिनकी कीमत 200 रुपये से शुरू होकर ज्यादा से ज्यादा बड़ी टोकरी व हॉट केस 500 रुपये में मिल जाता है। इसके चलते शहरी महिलाएं शोकेस में विभिन्न सामानों को रखने के लिए इन उत्पादों को खरीदती है। इसके अलावा इसका बड़ा बाजार सालभर में तीन दिनों तक चलने वाले छठ पूजा के दौरान भी महिलाएं इसको बड़ी मात्रा में खरीदारी करती है। गीता देवी बताती है कि अगर कोई महिला मेहनत से काम करे तो एक महीने में एक से दो दर्जन उत्पाद बना देती है। इससे उनकी प्रति माह आमदनी पांच से आठ हजार के बीच हो जाती है। इससे सरकंडा शहर के आसपास मिलना थोड़ा मुश्किल हो रहा है।
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कला को बचाने के हरसंभव प्रयास कर रहा हस्तशिल्प विभाग
हस्तशिल्प विभाग के अधिकारियों ने ही उन्हें वीट स्ट्रॉ मल्टीक्राफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी बनाने के लिए प्रेरित कर दर्जनों महिलाओं को इस कला से जोड़ने की मदद की। विभाग कच्चा माल उपलब्ध करवाकर आर्डर पर सामान को तैयार करवाता है। इससे काफी मदद मिलती है। बाकी दिनों में सोसायटी से जुड़ी महिलाएं उत्पाद तैयार कर रामनगर कॉलोनी स्थित दुकान पर सालभर बिक्री करती हैं। गीता देवी का कहना है कि यह विभाग के प्रचार का ही नतीजा है कि छठ पूजा से जुड़े शहर के आसपास के सैकड़ों लोग दुकान से पूजा का सामान खरीदने के लिए आते हैं। संवाद

खुद तैयार किए गए उत्पाद बतातीं गीता देवी