{"_id":"6aaae13bcf9933abb30a6072","slug":"jammu-kashmir-news-kathua-news-c-201-1-knt1008-136438-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: लखनपुर गोल्डन गेट्स, पल्ली मोड़ और लोगेट मोड़ पर हाईवे के ब्लैक स्पॉट सुधारे जाएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: लखनपुर गोल्डन गेट्स, पल्ली मोड़ और लोगेट मोड़ पर हाईवे के ब्लैक स्पॉट सुधारे जाएंगे
विज्ञापन
कठुआ। जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर सफर करने वाले वाहन चालकों और स्थानीय राहगीरों को अब जानलेवा दुर्घटनाओं के डर से मुक्ति मिलेगी। कठुआ जिले के तहत आने वाले तीन सबसे संवेदनशील दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, लखनपुर के गोल्डन गेट, लोगेट मोड़ और पल्ली मोड़ की सूरत जल्द ही बदलने जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इन खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स के सुधार, तकनीकी बदलाव और आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए 8.51 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि आए दिन होने वाले गंभीर हादसों पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
बीते साल के मुकाबले इस वर्ष हाईवे के इन तीनों क्षेत्रों में सड़क हादसों के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई थी। तीव्र मोड़, सड़कों के तकनीकी दोष और क्रॉसिंग पर सुरक्षा मानकों की कमी के चलते यहां लगातार जानमाल का नुकसान हो रहा था। जनहित और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, जम्मू ने इन दुर्घटना क्षेत्रों के स्थायी समाधान की तैयारी कर ली है। इस सुधारीकरण योजना को गति देने के लिए काम को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है।
योजना के तहत लखनपुर गोल्डन गेट क्षेत्र और लोगेट मोड़ को पहले चरण में शामिल किया गया है। वहीं, पल्ली मोड़ क्षेत्र में करीब 1.06 किलोमीटर लंबे हिस्से को दूसरे चरण में सुधारा जाएगा। इस कार्य में सड़क की जियोमेट्री में सुधार, बेहतर डिवाइडर, सर्विस लेन का व्यवस्थित जुड़ाव, उचित साइन बोर्ड और तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलाव शामिल हैं ताकि तेज रफ्तार वाहनों का आवागमन पूरी तरह सुरक्षित हो सके। एनएचएआई ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं, जिसके तहत निर्माण प्रकृति के आधार पर 3 से 10 वर्ष तक की निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी तय की गई है। जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होने के बाद इसे 6 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन तीनों स्थानों के तकनीकी सुधार से एनएच-44 पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और कठुआ से गुजरने वाले लाखों यात्रियों का सफर निर्बाध और सुरक्षित बन सकेगा।
विज्ञापन
कोट
हाईवे के पल्ली मोड़, लाेगेट और गोल्डन गेट्स के पास ब्लैक स्पॉट्स सुधारने का काम करवाए जाने की तैयारी है। इससे हादसों की कमी भी आएगी और यात्रियों और वाहन चालकों को भी सहूलियत मिलेगी।
-राजीव कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
विज्ञापन
बीते साल के मुकाबले इस वर्ष हाईवे के इन तीनों क्षेत्रों में सड़क हादसों के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई थी। तीव्र मोड़, सड़कों के तकनीकी दोष और क्रॉसिंग पर सुरक्षा मानकों की कमी के चलते यहां लगातार जानमाल का नुकसान हो रहा था। जनहित और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, जम्मू ने इन दुर्घटना क्षेत्रों के स्थायी समाधान की तैयारी कर ली है। इस सुधारीकरण योजना को गति देने के लिए काम को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है।
विज्ञापन
योजना के तहत लखनपुर गोल्डन गेट क्षेत्र और लोगेट मोड़ को पहले चरण में शामिल किया गया है। वहीं, पल्ली मोड़ क्षेत्र में करीब 1.06 किलोमीटर लंबे हिस्से को दूसरे चरण में सुधारा जाएगा। इस कार्य में सड़क की जियोमेट्री में सुधार, बेहतर डिवाइडर, सर्विस लेन का व्यवस्थित जुड़ाव, उचित साइन बोर्ड और तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलाव शामिल हैं ताकि तेज रफ्तार वाहनों का आवागमन पूरी तरह सुरक्षित हो सके। एनएचएआई ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं, जिसके तहत निर्माण प्रकृति के आधार पर 3 से 10 वर्ष तक की निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी तय की गई है। जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होने के बाद इसे 6 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन तीनों स्थानों के तकनीकी सुधार से एनएच-44 पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और कठुआ से गुजरने वाले लाखों यात्रियों का सफर निर्बाध और सुरक्षित बन सकेगा।
विज्ञापन
कोट
हाईवे के पल्ली मोड़, लाेगेट और गोल्डन गेट्स के पास ब्लैक स्पॉट्स सुधारने का काम करवाए जाने की तैयारी है। इससे हादसों की कमी भी आएगी और यात्रियों और वाहन चालकों को भी सहूलियत मिलेगी।
-राजीव कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई