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Kathua News: नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... जयघोष से गूंजा पंडाल
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चड़वाल में निकालते श्रीकृष्ण जन्म की झांकी। संवाद
- फोटो : kathua news
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हीरानगर। चड़वाल शिव मंदिर में जारी श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म की कथा सुनाई गई। कथावाचक कुलदीप शास्त्री ने अपने प्रवचन में भगवान के जन्म की कथा का ऐसा जीवंत चित्रण किया कि पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा।
उन्होंने कथा में बताया कि जब धरती पाप और अधर्म के भार से त्रस्त हो गई, तब स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संकल्प लिया। उन्होंने माता देवकी और वसुदेव की कठिन परिस्थितियों और कंस के अत्याचारों का वर्णन किया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन हुआ, पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... के जयघोष से गूंज उठा।
कथा के दौरान भगवान के जन्म की झांकी बेहद मनोरम रूप में प्रस्तुत की गई। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि के बीच झूमते हुए बधाई गीत गाए।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म का संदेश है कि जब भी अधर्म अपने चरम पर होता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को जीवन में अपनाएं और सच्चाई, भक्ति और परोपकार के मार्ग पर चलें। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
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उन्होंने कथा में बताया कि जब धरती पाप और अधर्म के भार से त्रस्त हो गई, तब स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संकल्प लिया। उन्होंने माता देवकी और वसुदेव की कठिन परिस्थितियों और कंस के अत्याचारों का वर्णन किया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन हुआ, पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... के जयघोष से गूंज उठा।
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कथा के दौरान भगवान के जन्म की झांकी बेहद मनोरम रूप में प्रस्तुत की गई। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि के बीच झूमते हुए बधाई गीत गाए।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म का संदेश है कि जब भी अधर्म अपने चरम पर होता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को जीवन में अपनाएं और सच्चाई, भक्ति और परोपकार के मार्ग पर चलें। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
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