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अब तक 41 घटनाओं ने किया लाखों का नुकसान
Updated Tue, 22 May 2018 02:25 PM IST
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कठुआ। गर्मी का मौसम चल रहा है, और फायर एंड एमरजेंसी विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी इसी मौसम में होती है। जनवरी से अब तक आग की 41 घटनाओं में लाखों का नुकसान हो चुका है। हाल ही में कुछ दिनों में ही सैकड़ों कनाल भूमि पर लगी गेहूं की फसल राख हो गई। इसमें वन विभाग का क्लोजर भी शामिल था।
आग की घटनाओं का कारण या तो थ्रेशिंग के कारण निकली चिंगारी है या फिर बिजली की तारों में होने वाले शार्ट सर्र्किट। ऐसे में विभाग ने लोगों को इन दुर्घटनाओं से बचने के लिए जागरूक रहने की अपील की है। गौरतलब है कि हर वर्ष इस सीजन में लाखों का नुकसान होता है और लोगों द्वारा कटाई के लिए जरूरी बचाव व्यवस्था नहीं अपनाने के कारण आग अधिक बढ़ती है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि थ्रेशिंग कटाई के बाद का सबसे अहम पड़ाव होता है और ऐसे में इस दौरान पानी का टब या कोई अन्य स्रोत पास ही रखना चाहिए। अगर कंबाइन लगाई हो तो भी पानी की व्यवस्था करके रखनी चाहिए ताकि ऐसी घटना होने पर विभाग टीम के पहुंचने से पूर्व ही स्थिति पर काबू पाया जा सके। उन्होंने कहा कि फायर टेंडर को पहुंचने में समय लगता है और मौके पर जो हो अगर वह ही इस प्रकार की व्यवस्था कर ले तो नुकसान कम हो सकता है।
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आग की घटनाओं का कारण या तो थ्रेशिंग के कारण निकली चिंगारी है या फिर बिजली की तारों में होने वाले शार्ट सर्र्किट। ऐसे में विभाग ने लोगों को इन दुर्घटनाओं से बचने के लिए जागरूक रहने की अपील की है। गौरतलब है कि हर वर्ष इस सीजन में लाखों का नुकसान होता है और लोगों द्वारा कटाई के लिए जरूरी बचाव व्यवस्था नहीं अपनाने के कारण आग अधिक बढ़ती है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि थ्रेशिंग कटाई के बाद का सबसे अहम पड़ाव होता है और ऐसे में इस दौरान पानी का टब या कोई अन्य स्रोत पास ही रखना चाहिए। अगर कंबाइन लगाई हो तो भी पानी की व्यवस्था करके रखनी चाहिए ताकि ऐसी घटना होने पर विभाग टीम के पहुंचने से पूर्व ही स्थिति पर काबू पाया जा सके। उन्होंने कहा कि फायर टेंडर को पहुंचने में समय लगता है और मौके पर जो हो अगर वह ही इस प्रकार की व्यवस्था कर ले तो नुकसान कम हो सकता है।
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