बिलावर। महावीर सेवा समिति भड्डू की ओर से गांव के शिव मंदिर में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर कथावाचक साध्वी रजनेश्वरी ने श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन देवताओं के राजा इंद्र के घमंड को चूर करने के का वर्णन सुनाया गया।
उन्होंने कहा कि लीला और क्रिया में बड़ा अंतर होता है। अभिमान और सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान कृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुल वासी सुखी और संपन्न थे। कथावाचक ने भगवान कृष्ण की भिन्न-भिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया। बृजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन कार्यक्रम की तैयारी करते हैं लेकिन भगवान कृष्ण उनको इंद्र की पूजा करने से मना कर देते हैं और गोवर्धन पूजा करने के लिए कहते हैं। यह बात सुनकर भगवान इंद्र नाराज हो जाते हैं और गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा करते हैं। मूसलाधार बारिश को देखकर समस्त बृजवासी भयभीत हो जाते हैं। भारी वर्षा को देखकर भगवान कृष्ण कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर समस्त ब्रिज वासियों को उसके नीचे छिपा लेते हैं। भगवान की ओर से गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों को बचाने से इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया।