कठुआ। चौरासी लाख योनियों के बाद मनुष्य शरीर मिलता है। जब ये मैला कुचैला पलीत मनुष्य सतगुरु के समक्ष जाता है। सतगुरु के चरणों में पहुंचता है तो सतगुरु पूरा ज्ञान खोल देता है। कोई दूसरा मंत्र नहीं देता पूरा ब्रह्मांड दिखाकर मनुष्य की अंदर और बाहर की मलीनता खत्म कर देता है। यह प्रवचन संत निरंकारी मंडल के उप मुख्य संचालक शुभ कर्ण ने कठुआ में आयोजित सत्संग के दौरान कहे।
सत्संग में नगरी, बुद्धि, मुठ्ठी, के सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। संत निरंकारी मंडल के संचालक शुभकर्ण ने संगत को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते वक्त कहा कि हे अर्जुन तू सभी को छोड़कर मेरी शरण में आ जा। जिस तरह एक जलती हुई चिंगारी लाखों मन लकड़ियों के ढेर को जलाकर राख कर देती है, इसी तरह मेरा तत्व ज्ञान पापों का नाश कर देता है। अर्जुन जिसकी आंखें तेज थीं, जिसने मछली की आंख को निशाना लगाना था। इतनी तीव्र आंख वाले को ईश्वर दिखाई नहीं दिया। ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करने के बाद समझ आ गया कि यह ही निरंकार हैं। सारे भ्रम मिट गए। आत्मा और परमात्मा एक हो गए। परमात्मा ने जब जन्म दिया तो पांच विकार साथ लगा दिए। सतगुरु ने इन पांच विकारों पर कंट्रोल करना सिखाया। जीवन यात्रा करने के लिए इन पांचों का प्रयोग करना भी जरूरी है। इस अवसर पर बीआर निरंकारी,उप संचालक एसके दत्ता, सत पाल निरंकारी, अनु शर्मा, कुसुम दत्ता, जोनल इंचार्ज उधमपुर बीपी सिंह भी उपस्थित रहे।