{"_id":"68b60373cfbb5adacb03617c","slug":"bail-granted-to-the-accused-in-the-case-of-assault-by-blocking-the-road-kathua-news-c-201-1-knt1009-123607-2025-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: रास्ता रोककर मारपीट के मामले में आरोपी को जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: रास्ता रोककर मारपीट के मामले में आरोपी को जमानत
विज्ञापन
विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने रास्ता रोक कर मारपीट करने के मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी है। आदेश के अनुसार आरोपी को जमानत के लिए 15 हजार के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को किसी भी तरीके से प्रभावित नहीं करेगा। अगर वह ऐसा करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत को रद्द करने की मांग कर सकता है।
पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के अनुसार आरोपी सुमोहन पुत्र सलीम निवासी नंदला गुरदासपुर (पंजाब) पर आरोप है कि उसने बीते जुलाई महीने में कठुआ में शिकायतकर्ता का रास्ता रोका। आरोपी ने शिकायतकर्ता को बिना किसी कारण के अपशब्द कहे। विरोध करने पर शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की गई। आरोपियों ने धमकी भी दी। इसके बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत कठुआ थाने में की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। बीते महीने आरोपी ने कोर्ट के समक्ष जमानत की अर्जी दी। इसमें बताया कि वह निर्दोष है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। लिहाजा आरोपी को जमानत देने की अपील की गई, जिसका अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी के खिलाफ सभी आरोपित धाराएं जमानती हैं और आरोपी को जमानत देना उसका अधिकार है। कहा कि जब तक दोष सिद्ध नहीं होता, आरोपी को निर्दोष माना जाता है। चूंकि आरोप गंभीर नहीं हैं और इनमें न तो आजीवन कारावास है और न ही मृत्युदंड, इसलिए आरोपी को 15 हजार के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती मुचलके पर रिहा करने का निर्णय सुनाया गया। अदालत से जमानत इन शर्तों के साथ देना का निर्देश दिया कि आरोपी न तो जांच में बाधा डालेगा और न ही गवाहों को प्रभावित करेगा।
विज्ञापन
पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के अनुसार आरोपी सुमोहन पुत्र सलीम निवासी नंदला गुरदासपुर (पंजाब) पर आरोप है कि उसने बीते जुलाई महीने में कठुआ में शिकायतकर्ता का रास्ता रोका। आरोपी ने शिकायतकर्ता को बिना किसी कारण के अपशब्द कहे। विरोध करने पर शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की गई। आरोपियों ने धमकी भी दी। इसके बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत कठुआ थाने में की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। बीते महीने आरोपी ने कोर्ट के समक्ष जमानत की अर्जी दी। इसमें बताया कि वह निर्दोष है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। लिहाजा आरोपी को जमानत देने की अपील की गई, जिसका अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी के खिलाफ सभी आरोपित धाराएं जमानती हैं और आरोपी को जमानत देना उसका अधिकार है। कहा कि जब तक दोष सिद्ध नहीं होता, आरोपी को निर्दोष माना जाता है। चूंकि आरोप गंभीर नहीं हैं और इनमें न तो आजीवन कारावास है और न ही मृत्युदंड, इसलिए आरोपी को 15 हजार के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती मुचलके पर रिहा करने का निर्णय सुनाया गया। अदालत से जमानत इन शर्तों के साथ देना का निर्देश दिया कि आरोपी न तो जांच में बाधा डालेगा और न ही गवाहों को प्रभावित करेगा।
विज्ञापन