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Kathua News: बांस कारीगरों के लिए 30 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
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कठुआ के सल्लन स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर में बांस कलाकृतियों के उन्नयन के लिए 30 दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय जम्मू ने नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल फॉर बिजनेस डेवलपमेंट काउंसिल्स असम के सहयोग से इसका आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त कठुआ सुरिंदर शर्मा ने कारीगरों को उत्साहित किया।
आयुक्त कठुआ ने शिल्पकारों से इस कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने पारंपरिक शिल्प में नवाचार और मूल्यवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान एडीडीसी सुरेंद्र मोहन और विभाग की सहायक निदेशक डॉ. रोहिणी द्वारा स्थानीय शिल्पकारों को टूल किट वितरित किए गए। बताया कि इसका मकसद है कि वे अपने शिल्प में दक्षता प्राप्त कर सकें। इस अवसर पर असम से आए दो मास्टर ट्रेनर, प्रणब डोहट्टी और संदीप वर्मा को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
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कार्यक्रम में स्थानीय शिल्पकार सरदारी लाल और शिवाल्या मगोत्रा ने बताया कि बांस शिल्प ने कैसे उनकी जिंदगी को बदला है। मुख्य अतिथि ने विभाग को निर्देश दिए कि वे अन्य राज्यों और देशों के सफल मॉडलों को अपनाकर बांस शिल्प को और अधिक सशक्त बनाएं। उन्होंने विभाग द्वारा स्थापित मशीनों का भी निरीक्षण किया, जो उत्तर-पूर्वी भारत के मॉडल को जम्मू-कश्मीर में दोहराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम के अंत में एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि और सहायक निदेशक ने शिल्पकारों की समस्याएं और सुझाव सुने।
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आयुक्त कठुआ ने शिल्पकारों से इस कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने पारंपरिक शिल्प में नवाचार और मूल्यवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
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कार्यक्रम के दौरान एडीडीसी सुरेंद्र मोहन और विभाग की सहायक निदेशक डॉ. रोहिणी द्वारा स्थानीय शिल्पकारों को टूल किट वितरित किए गए। बताया कि इसका मकसद है कि वे अपने शिल्प में दक्षता प्राप्त कर सकें। इस अवसर पर असम से आए दो मास्टर ट्रेनर, प्रणब डोहट्टी और संदीप वर्मा को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
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कार्यक्रम में स्थानीय शिल्पकार सरदारी लाल और शिवाल्या मगोत्रा ने बताया कि बांस शिल्प ने कैसे उनकी जिंदगी को बदला है। मुख्य अतिथि ने विभाग को निर्देश दिए कि वे अन्य राज्यों और देशों के सफल मॉडलों को अपनाकर बांस शिल्प को और अधिक सशक्त बनाएं। उन्होंने विभाग द्वारा स्थापित मशीनों का भी निरीक्षण किया, जो उत्तर-पूर्वी भारत के मॉडल को जम्मू-कश्मीर में दोहराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम के अंत में एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि और सहायक निदेशक ने शिल्पकारों की समस्याएं और सुझाव सुने।