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क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पशुचारा जुटाना बनी चुनौती
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ऊना। क्षेत्र में भीषण गर्मी अन्य वर्गों के साथ पशुपालकों के लिए भी एक मुसीबत बन चुकी है। पर्याप्त बारिश न होने के कारण स्वां नदी के आसपास के क्षेत्रों में अभी तक हरी घास नहीं उगी है। ऐसे में पशुपालकों को चारे के तौर पर तूड़ी और खेतों के चरी व बाजरा लाकर पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।
हालांकि आने वाले दिनों में अगर लगातार बारिश होती है तो हरी घास उगने से दो महीनों तक पशुपालकों को कुछ हद तक राहत मिल पाती है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में इस समय तूड़ी के दाम 1200 से 1500 रुपये तक पहुंच गए हैं। ऐसे में पशुपालकों के लिए हर समय चारे के लिए तूड़ी का इस्तेमाल महंगा सौदा साबित हो रहा है। ऐसे में कई लोगों के सिंचाई व्यवस्था वाले अपने खेतों में चरी और बाजरा लगाया हुआ है और उन्हें तूड़ी के साथ मिलाकर चारे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
पशुपालक रमेश चंद, दिवान चंद, जितेंद्र सिंह व राकेश कुमार का कहना है कि तूड़ी के दामों ने इस बार कमर तोड़ दी। कहा कि इससे पहले कभी इतने दाम नहीं हुए। कहा कि अब वे चारे के अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। कहा कि स्वां नदी के किनारे घास उगने से उन्हें काफी राहत मिलेगी और उन्हें अब बरसात का इंतजार है।
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बता दें कि इस बार तूड़ी के दाम पहले के मुकाबले दोगुने हैं। इसका पहला कारण यह है कि मौसम की मार से गेहूं फसल कई जगह खराब हो गई।
ऐसे में तूड़ी की पैदावार कम हुई। मांग अधिक बढ़ने पर तूड़ी के दाम भी बढ़ते चले गए। एक अन्य कारण यह भी है कि कई स्थानों पर लोगों ने तूड़ी को खरीदकर स्टॉक कर लिया। पंजाब के सीमावर्ती हिस्सों में कई लोगों ने ऐसा किया है। अब वे लोग इसे महंगे दामों पर बेच रहे हैं और पशुपालकों को इसे मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है।
उपनिदेशक जिला पशुपालन विभाग जेएस सेन ने बताया कि पशुओं के लिए तूड़ी सबसे सस्ते चारों में से एक है। कहा कि इसकी कीमत तय करने को लेकर शीघ्र रणनीति तैयार की जाएगी।
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हालांकि आने वाले दिनों में अगर लगातार बारिश होती है तो हरी घास उगने से दो महीनों तक पशुपालकों को कुछ हद तक राहत मिल पाती है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में इस समय तूड़ी के दाम 1200 से 1500 रुपये तक पहुंच गए हैं। ऐसे में पशुपालकों के लिए हर समय चारे के लिए तूड़ी का इस्तेमाल महंगा सौदा साबित हो रहा है। ऐसे में कई लोगों के सिंचाई व्यवस्था वाले अपने खेतों में चरी और बाजरा लगाया हुआ है और उन्हें तूड़ी के साथ मिलाकर चारे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
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पशुपालक रमेश चंद, दिवान चंद, जितेंद्र सिंह व राकेश कुमार का कहना है कि तूड़ी के दामों ने इस बार कमर तोड़ दी। कहा कि इससे पहले कभी इतने दाम नहीं हुए। कहा कि अब वे चारे के अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। कहा कि स्वां नदी के किनारे घास उगने से उन्हें काफी राहत मिलेगी और उन्हें अब बरसात का इंतजार है।
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बता दें कि इस बार तूड़ी के दाम पहले के मुकाबले दोगुने हैं। इसका पहला कारण यह है कि मौसम की मार से गेहूं फसल कई जगह खराब हो गई।
ऐसे में तूड़ी की पैदावार कम हुई। मांग अधिक बढ़ने पर तूड़ी के दाम भी बढ़ते चले गए। एक अन्य कारण यह भी है कि कई स्थानों पर लोगों ने तूड़ी को खरीदकर स्टॉक कर लिया। पंजाब के सीमावर्ती हिस्सों में कई लोगों ने ऐसा किया है। अब वे लोग इसे महंगे दामों पर बेच रहे हैं और पशुपालकों को इसे मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है।
उपनिदेशक जिला पशुपालन विभाग जेएस सेन ने बताया कि पशुओं के लिए तूड़ी सबसे सस्ते चारों में से एक है। कहा कि इसकी कीमत तय करने को लेकर शीघ्र रणनीति तैयार की जाएगी।