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Una News: मोटे अनाज से मिली नई दिशा, नई उम्मीद
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पूजा रानी ने 25 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
खुद मास्टर ट्रेनर से ट्रेंड होकर आगे महिलाओं को किया प्रशिक्षित, हर माह महिलाएं कमा रहीं 12000 रुपये
सभी चीजों को घर पर ही दो-दो किलोग्राम के पैकेट में करती हैं पैक
मिश्रित अनाज के आटे की पहले ही हो जाती बुकिंग
आटा 80 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से धड़ाधड़ बिक रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। बटूही गांव की पूजा रानी ने जैविक तरीके से मोटे अनाजों की खेती कर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। पूजा ने न केवल खुद को सशक्त बनाया है, बल्कि अपनी मेहनत और अनुभव से अन्य 25 महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर उन्हें प्रति माह लगभग 12,000 रुपये की आय अर्जित करने योग्य बनाया है।
पूजा रानी के खेतों में ज्वार, बाजरा, रागी, सोयाबीन, काले चने, अलसी, मोरिंगा, कंगनी आदि मोटे अनाजों की जैविक खेती की जाती है। खेती शुरू करने से पहले खेतों में पूर्व में उपयोग किए गए रासायनिक कीटनाशकों का प्रभाव कम करने के लिए जीवामृत घोल का छिड़काव किया जाता है। इसके बाद भूमि को कुछ समय के लिए विश्राम दिया जाता है ताकि उसमें मौजूद पेस्टिसाइड और यूरिया का असर समाप्त हो जाए।
पूजा ने बताया कि उन्होंने अपनी मास्टर ट्रेनर से प्रशिक्षण प्राप्त कर यह जैविक खेती शुरू की थी। उगाई गई फसलों को घर पर ही पीसकर दो-दो किलोग्राम के पैकेटों में तैयार किया जाता है। यह मल्टीग्रेन (मिश्रित अनाज) आटा पोषक तत्वों से भरपूर है, जिसमें विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, अमीनो एसिड, सल्फर तथा अन्य कई औषधीय गुण पाए जाते हैं।
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पूजा बताती हैं कि उनके इस मल्टीग्रेन आटे की घर पर ही पहले से बुकिंग हो जाती है। यह आटा 80 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से आसानी से बिक जाता है। आयुर्वेद से जुड़े लोग जो इसके महत्व को समझते हैं, नियमित रूप से इसका उपयोग कर स्वस्थ और निरोग जीवन जी रहे हैं। पूजा का कहना है कि यदि लग्न और मेहनत से काम किया जाए तो इस कार्य से अच्छी-खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
ग्रामीण आजीविका मिशन की मास्टर ट्रेनर मीना देवी बताती हैं कि घर पर बनाए गए सभी उत्पाद 100% शुद्ध होते हैं और उनके सकारात्मक परिणाम कुछ ही दिनों में दिखाई देने लगते हैं। उन्होंने अब तक लगभग 120 महिलाओं को विभिन्न उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया है। इससे न केवल उनकी स्वयं की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि अन्य महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं।
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खुद मास्टर ट्रेनर से ट्रेंड होकर आगे महिलाओं को किया प्रशिक्षित, हर माह महिलाएं कमा रहीं 12000 रुपये
सभी चीजों को घर पर ही दो-दो किलोग्राम के पैकेट में करती हैं पैक
मिश्रित अनाज के आटे की पहले ही हो जाती बुकिंग
आटा 80 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से धड़ाधड़ बिक रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। बटूही गांव की पूजा रानी ने जैविक तरीके से मोटे अनाजों की खेती कर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। पूजा ने न केवल खुद को सशक्त बनाया है, बल्कि अपनी मेहनत और अनुभव से अन्य 25 महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर उन्हें प्रति माह लगभग 12,000 रुपये की आय अर्जित करने योग्य बनाया है।
पूजा रानी के खेतों में ज्वार, बाजरा, रागी, सोयाबीन, काले चने, अलसी, मोरिंगा, कंगनी आदि मोटे अनाजों की जैविक खेती की जाती है। खेती शुरू करने से पहले खेतों में पूर्व में उपयोग किए गए रासायनिक कीटनाशकों का प्रभाव कम करने के लिए जीवामृत घोल का छिड़काव किया जाता है। इसके बाद भूमि को कुछ समय के लिए विश्राम दिया जाता है ताकि उसमें मौजूद पेस्टिसाइड और यूरिया का असर समाप्त हो जाए।
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पूजा ने बताया कि उन्होंने अपनी मास्टर ट्रेनर से प्रशिक्षण प्राप्त कर यह जैविक खेती शुरू की थी। उगाई गई फसलों को घर पर ही पीसकर दो-दो किलोग्राम के पैकेटों में तैयार किया जाता है। यह मल्टीग्रेन (मिश्रित अनाज) आटा पोषक तत्वों से भरपूर है, जिसमें विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, अमीनो एसिड, सल्फर तथा अन्य कई औषधीय गुण पाए जाते हैं।
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पूजा बताती हैं कि उनके इस मल्टीग्रेन आटे की घर पर ही पहले से बुकिंग हो जाती है। यह आटा 80 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से आसानी से बिक जाता है। आयुर्वेद से जुड़े लोग जो इसके महत्व को समझते हैं, नियमित रूप से इसका उपयोग कर स्वस्थ और निरोग जीवन जी रहे हैं। पूजा का कहना है कि यदि लग्न और मेहनत से काम किया जाए तो इस कार्य से अच्छी-खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
ग्रामीण आजीविका मिशन की मास्टर ट्रेनर मीना देवी बताती हैं कि घर पर बनाए गए सभी उत्पाद 100% शुद्ध होते हैं और उनके सकारात्मक परिणाम कुछ ही दिनों में दिखाई देने लगते हैं। उन्होंने अब तक लगभग 120 महिलाओं को विभिन्न उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया है। इससे न केवल उनकी स्वयं की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि अन्य महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं।