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Una News: शैक्षिक संघ ने जियो फेसिंग अटेंडेंस प्रणाली का जताया विरोध
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कहा, निजी मोबाइल फोन पर लोकेशन ट्रैकिंग निजता के अधिकार का उल्लंघन
मांग को लेकर प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंब (ऊना)। हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शैक्षिक संघ की स्थानीय इकाई ने जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति प्रणाली का विरोध किया। महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय अंब के शिक्षकों ने इस प्रणाली का विरोध जताते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ. दर्शन धीमान को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के बजाय उन पर अनावश्यक निगरानी का बोझ डाल रही है।
ज्ञापन में उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी मोबाइल फोन पर लोकेशन ट्रैकिंग उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है और यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी खिलाफ है। साथ ही लोकेशन डेटा साझा करने से साइबर अपराध और डाटा लीक का खतरा बढ़ सकता है, जो विशेषकर महिला कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि जब महाविद्यालयों में बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली पहले से लागू है तो जियो-फेंसिंग की कोई आवश्यकता नहीं है। यह भी प्रश्न उठाया गया कि यह प्रणाली केवल शिक्षा विभाग में ही क्यों लागू की जा रही है, जबकि अन्य सरकारी विभागों में इसे लागू नहीं किया गया है। शिक्षकों ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मोबाइल एप से उपस्थिति दर्ज कराने की चिंता में उलझ जाते हैं। नेटवर्क की अनुपलब्धता की स्थिति में यह व्यवस्था उन्हें अनावश्यक मानसिक दबाव में डालती है। उनका मानना है कि कक्षाओं में प्रभावी अध्यापन से ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, न कि केवल जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति से। संघ के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि सरकार इस व्यवस्था को तुरंत वापस ले और पूर्व की भांति बायोमीट्रिक प्रणाली को ही अपनाए। शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के पक्षधर हैं, लेकिन शिक्षक-हित विरोधी और तकनीकी रूप से असुविधाजनक व्यवस्थाओं का विरोध जारी रहेगा। इस अवसर पर संघ की स्थानीय इकाई के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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मांग को लेकर प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंब (ऊना)। हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शैक्षिक संघ की स्थानीय इकाई ने जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति प्रणाली का विरोध किया। महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय अंब के शिक्षकों ने इस प्रणाली का विरोध जताते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ. दर्शन धीमान को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के बजाय उन पर अनावश्यक निगरानी का बोझ डाल रही है।
ज्ञापन में उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी मोबाइल फोन पर लोकेशन ट्रैकिंग उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है और यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी खिलाफ है। साथ ही लोकेशन डेटा साझा करने से साइबर अपराध और डाटा लीक का खतरा बढ़ सकता है, जो विशेषकर महिला कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि जब महाविद्यालयों में बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली पहले से लागू है तो जियो-फेंसिंग की कोई आवश्यकता नहीं है। यह भी प्रश्न उठाया गया कि यह प्रणाली केवल शिक्षा विभाग में ही क्यों लागू की जा रही है, जबकि अन्य सरकारी विभागों में इसे लागू नहीं किया गया है। शिक्षकों ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मोबाइल एप से उपस्थिति दर्ज कराने की चिंता में उलझ जाते हैं। नेटवर्क की अनुपलब्धता की स्थिति में यह व्यवस्था उन्हें अनावश्यक मानसिक दबाव में डालती है। उनका मानना है कि कक्षाओं में प्रभावी अध्यापन से ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, न कि केवल जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति से। संघ के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि सरकार इस व्यवस्था को तुरंत वापस ले और पूर्व की भांति बायोमीट्रिक प्रणाली को ही अपनाए। शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के पक्षधर हैं, लेकिन शिक्षक-हित विरोधी और तकनीकी रूप से असुविधाजनक व्यवस्थाओं का विरोध जारी रहेगा। इस अवसर पर संघ की स्थानीय इकाई के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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