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प्रति हेक्टेयर पौधरोपण पर मिलेगी 1.20 लाख की सहायता राशि : राणा
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कहा- पर्यावरण संरक्षण की राह दिखा रही राजीव गांधी वन संवर्धन योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के अंतर्गत महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक संगठनों को वनीकरण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक समूह को एक से पांच हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण और पांच वर्षों तक पौधों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। डीएफओ ऊना सुशील राणा ने बताया कि प्रति हेक्टेयर पौधरोपण पर समूहों को 1.20 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। पौधों की जीवित रहने की दर के आधार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। यदि 50 प्रतिशत से अधिक पौधे सुरक्षित रहते हैं तो समूह को एक लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। ऊना जिले के सभी वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। साथ ही पुराने पौधों की देखभाल और क्षतिग्रस्त पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य बंजर और अनुपयोगी वन भूमि को हरा-भरा बनाना है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों को रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराना भी इसका अहम हिस्सा है। प्रदेशभर में इस योजना को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसमें वन प्रबंधन में जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि ऊना जिला प्रशासन प्रदेश सरकार की सोच के अनुरूप इस योजना को प्रभावी ढंग से ज़मीन पर उतार रहा है। युवाओं और स्थानीय समूहों को निरंतर पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके और ग्रामीण आर्थिकी को भी मजबूती मिले।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के अंतर्गत महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक संगठनों को वनीकरण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक समूह को एक से पांच हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण और पांच वर्षों तक पौधों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। डीएफओ ऊना सुशील राणा ने बताया कि प्रति हेक्टेयर पौधरोपण पर समूहों को 1.20 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। पौधों की जीवित रहने की दर के आधार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। यदि 50 प्रतिशत से अधिक पौधे सुरक्षित रहते हैं तो समूह को एक लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। ऊना जिले के सभी वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। साथ ही पुराने पौधों की देखभाल और क्षतिग्रस्त पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य बंजर और अनुपयोगी वन भूमि को हरा-भरा बनाना है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों को रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराना भी इसका अहम हिस्सा है। प्रदेशभर में इस योजना को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसमें वन प्रबंधन में जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि ऊना जिला प्रशासन प्रदेश सरकार की सोच के अनुरूप इस योजना को प्रभावी ढंग से ज़मीन पर उतार रहा है। युवाओं और स्थानीय समूहों को निरंतर पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके और ग्रामीण आर्थिकी को भी मजबूती मिले।