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Una News: सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के आदेश के खिलाफ अपील खारिज

Fri, 18 Sep 2026 12:03 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 18 Sep 2026 12:03 AM IST
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Appeal against order to remove encroachment from government land dismissed.
दुलैहड़ (ऊना)। सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में बेदखली के आदेश के खिलाफ दायर दो अपीलों को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-द्वितीय कांता वर्मा की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कब्जाधारियों ने जमीन पर लंबे समय से कब्जा होने और इसी आधार पर स्वामित्व का दावा किया था। ऐसे मामले में राजस्व अधिकारी को सिविल कोर्ट की तरह प्रक्रिया अपनाकर कब्जे के दावे का फैसला करना जरूरी था। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए राजस्व अधिकारी का आदेश जिला अदालत में अपील योग्य नहीं था।मामला ऊना-हमीरपुर राज्य राजमार्ग पर रेलवे स्टेशन रोड के समीप सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़ा है। 27 मार्च 2023 को अरनियाला निवासी एक व्यक्ति ने एसडीओ ऊना को शिकायत देकर बताया कि सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर निर्माण कर लिया है। शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग ने मौके की रिपोर्ट तैयार करवाई। रिपोर्ट में एक व्यक्ति के कब्जे में करीब 235 वर्गमीटर सरकारी जमीन पाई गई, यहां मकान और दुकान बनाए जाने की बात सामने आई। वहीं अन्य कब्जाधारियों के पास करीब 66 वर्ग मीटर जमीन पाई गई, जहां ढाबा और दुकानें बनी थीं। इसके बाद राजस्व अधिकारी ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर कब्जे के संबंध में जवाब मांगा। नोटिस के जवाब में कब्जाधारियों ने जमीन पर दशकों से कब्जा होने का दावा किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले जमीन सामुदायिक उपयोग की थी और बाद में राजस्व रिकॉर्ड में इसे सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया। कब्जाधारियों ने लंबे समय से खुले और लगातार कब्जे के आधार पर जमीन पर अपना हक बनने की बात कही।
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मामले में दोनों पक्षों ने अपने-अपने गवाह और दस्तावेज पेश किए। सुनवाई के बाद सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी ऊना ने 31 मई 2025 को सरकारी जमीन पर कब्जा पाए जाने के आधार पर संबंधित लोगों को जमीन से बेदखल करने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ दो अलग-अलग अपीलें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत में दायर की गईं। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने लंबे समय से जमीन पर कब्जे का दावा किया था, इसलिए राजस्व अधिकारी को इस दावे का फैसला सिविल कोर्ट की तरह करना चाहिए था। अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी बेदखली के मामले में कब्जाधारी लंबे समय से जमीन पर कब्जे के आधार पर स्वामित्व का दावा करता है तो राजस्व अधिकारी को उस सवाल का फैसला सिविल कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार करना होता है। यदि राजस्व अधिकारी इस प्रक्रिया का पालन नहीं करता और केवल कब्जा हटाने का आदेश जारी करता है तो इस आदेश को जिला अदालत में अपील के जरिये चुनौती नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने दोनों अपीलें खारिज कर दीं। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने के निर्देश दिए गए।
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