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Solan News: नालागढ़ और बद्दी के खरीद केंद्रों में धान रखने के लिए नहीं जगह
Mon, 21 Oct 2024 05:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:41 PM IST
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दोनों केंद्रों में शेड भरने के बाद खुले में रखा जा रहा धान
सेलरों की ओर से खरीद केंद्र से धान न उठाने से आ रही दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। नालागढ़ और बद्दी के खरीद केंद्रों में अब धान रखने की जगह नहीं बची है। जिससे अब धान खुले में रखना शुरू कर दिया गया है। प्रतिकूल मौसम के दौरान धान खराब होने का खतरा बना हुआ है। सेलर द्वारा यहां के खरीद केंद्रों से धान न उठाने से यह समस्या आई है। पंजाब व हरियाणा की मंडियों में हिमाचल का धान न लेने से किसानों ने इस बार अपना धान सिविल सप्लाई के खरीद केंद्रों में बेचा। खरीद केंद्रों में उम्मीद से ज्यादा किसान आने से यहां पर शेड में रखने की जगह नहीं बची है।
जिससे सिविल सप्लाई के कर्मचारियों ने धान को खुले में रखना शुरू कर दिया है। अगर मौसम खराब होता है तो धान खराब होने का खतरा बना हुआ है। नालागढ़ व बद्दी के मलपुर में खुले खरीद केंद्रों में धान बेचने वालों का तांता लगा हुआ है। लोग अपना धान बेचने के लिए खरीद केंद्रों में कई-कई दिन लगा रहे हैं। पंजीकरण कराने के बाद किसान अपना धान मंडी में पहुंचाते हैं और वहां पर झरने के बाद धान की तुलाई का कार्य होता है। दोनों केंद्रों में दस-दस झरने लगे हुए हैं। अब दोनों खरीद केंद्रों में शेड भर जाने के बाद धान खुले में रख रहे हैं।
मलपुर खरीद केंद्र में पिछले कई दिनों से धान को खुले आसमान के नीचे रखा जा रहा है। सिविल सप्लाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिकूल मौसम के लिए उनके पास प्रबंध है। उनका धान नालागढ़ के देवली सेलर में जाना शुरू हो गया है। जहां से उसके चावल तैयार करके वापस सिविल सप्लाई को भेजने का कार्य चल गया है। अब जितना धान आ रहा है उतना निकल भी रहा है। वहीं किसानों का कहना है कि नालागढ़ में धान की ट्राॅली खड़ा करने के लिए भी जगह नहीं बची है। इससे किसान अपना धान वापस ले जा रहे हैं।
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नालागढ़ बड़ा बसोट के अजमेर सिंह ने बताया कि दो दिन ट्राॅली खरीद केंद्र में खड़ी करने के बाद उन्हें वापस लानी पड़ी। खरीद केंद्र में धान रखने की जगह नहीं है। वहीं, दूसरी ओर कृषि उपज मंडी नालागढ़ के प्रभारी गंगा राम ने बताया कि मलपुर में 215 व नालागढ़ में 148 किसान अभी तक अपना धान बेच चुके हैं। अभी तक 17 हजार क्विंटल धान बिक चुका है, जिसमें बद्दी में 10 हजार 129 व नालागढ़ में सात हजार 658 क्विंटल धान बिक चुका है।
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सेलरों की ओर से खरीद केंद्र से धान न उठाने से आ रही दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। नालागढ़ और बद्दी के खरीद केंद्रों में अब धान रखने की जगह नहीं बची है। जिससे अब धान खुले में रखना शुरू कर दिया गया है। प्रतिकूल मौसम के दौरान धान खराब होने का खतरा बना हुआ है। सेलर द्वारा यहां के खरीद केंद्रों से धान न उठाने से यह समस्या आई है। पंजाब व हरियाणा की मंडियों में हिमाचल का धान न लेने से किसानों ने इस बार अपना धान सिविल सप्लाई के खरीद केंद्रों में बेचा। खरीद केंद्रों में उम्मीद से ज्यादा किसान आने से यहां पर शेड में रखने की जगह नहीं बची है।
जिससे सिविल सप्लाई के कर्मचारियों ने धान को खुले में रखना शुरू कर दिया है। अगर मौसम खराब होता है तो धान खराब होने का खतरा बना हुआ है। नालागढ़ व बद्दी के मलपुर में खुले खरीद केंद्रों में धान बेचने वालों का तांता लगा हुआ है। लोग अपना धान बेचने के लिए खरीद केंद्रों में कई-कई दिन लगा रहे हैं। पंजीकरण कराने के बाद किसान अपना धान मंडी में पहुंचाते हैं और वहां पर झरने के बाद धान की तुलाई का कार्य होता है। दोनों केंद्रों में दस-दस झरने लगे हुए हैं। अब दोनों खरीद केंद्रों में शेड भर जाने के बाद धान खुले में रख रहे हैं।
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मलपुर खरीद केंद्र में पिछले कई दिनों से धान को खुले आसमान के नीचे रखा जा रहा है। सिविल सप्लाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिकूल मौसम के लिए उनके पास प्रबंध है। उनका धान नालागढ़ के देवली सेलर में जाना शुरू हो गया है। जहां से उसके चावल तैयार करके वापस सिविल सप्लाई को भेजने का कार्य चल गया है। अब जितना धान आ रहा है उतना निकल भी रहा है। वहीं किसानों का कहना है कि नालागढ़ में धान की ट्राॅली खड़ा करने के लिए भी जगह नहीं बची है। इससे किसान अपना धान वापस ले जा रहे हैं।
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नालागढ़ बड़ा बसोट के अजमेर सिंह ने बताया कि दो दिन ट्राॅली खरीद केंद्र में खड़ी करने के बाद उन्हें वापस लानी पड़ी। खरीद केंद्र में धान रखने की जगह नहीं है। वहीं, दूसरी ओर कृषि उपज मंडी नालागढ़ के प्रभारी गंगा राम ने बताया कि मलपुर में 215 व नालागढ़ में 148 किसान अभी तक अपना धान बेच चुके हैं। अभी तक 17 हजार क्विंटल धान बिक चुका है, जिसमें बद्दी में 10 हजार 129 व नालागढ़ में सात हजार 658 क्विंटल धान बिक चुका है।