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होटलों में बुकिंग रद्द करवाने के लिए फोन की घंटियां बजना शुरू
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कालका शिमला हाईवे पर होटल रूके सैलानी यहां पर पर्यटकों को संख्य घटती नजर आ रही है। संवाद
- फोटो : SOLAN
सोलन। मौसम के रेड अलर्ट के बाद पर्यटकों को आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट लाने की हिदायत जारी होने के बाद होटलों में बुकिंग रद्द करवाने के लिए फोन की घंटियां बजना शुरू हो गई हैं। वीकेंड पर जिले के पर्यटन क्षेत्र चायल और बड़ोग में केवल 20 और कसौली में 40 फीसदी बुकिंग ही रह गई है।
इसे लेकर होटल व्यवसायियों को चिंता सताने लगी है। सरकार की एडवायजरी के अनुसार, हिमाचल के प्रवेश द्वार परवाणू में वैक्सीन और आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं ली जा रही है। इसके बावजूद पर्यटकों की संख्या पर असर दिखना शुरू हो गया है। इन आदेशों के बाद से होटल कारोबारियों में असमंजस बना हुआ है। होटलियर्स सरकार से मांग कर रहे हैं कि आटीपीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता न कर एसओपी का पालन करवाना चाहिए।
दूसरी लहर में राहत के बाद सरकार ने पर्यटकों के लिए नियमों में राहत दी थी। इसके बाद पर्यटकों ने हिमाचल आना शुरू किया और होटलों में बुकिंग बढ़ने लगी। शुरुआत में वीकेंड पर होटलों में ऑक्यूपेंसी सौ फीसदी रही। इस बीच बरसात ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू किया। इस कारण भी पर्यटकों ने हिमाचल का रुख कम कर दिया। इस दौरान भी होटलों में बुकिंग रद्द हो गई। अब सरकार से जारी आदेशों के बाद बुकिंग पर असर पड़ गया है।
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होटल का खर्च और स्टाफ की चिंता : देवेंद्र
चायल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र वर्मा ने कहा कि सरकार के आदेशों के बाद होटल के बुकिंग रद्द हो गई। अब होटल व्यवसायियों को एक बार फिर मंदी की मार झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि होटलों में ठहरे पर्यटकों से अभी तक कोई भी कोरोना संक्रमण का मामला नहीं आया है और न ही स्टाफ से। सभी के टेस्ट करवाए गए थे। सभी होटलों में एसओपी की पूरी तरह से पालना की जा रही है। होटलों में इसी तरह ऑक्यूपेंसी गिरती रही तो होटलों का खर्च और स्टाफ का वेतन की चिंता से व्यवसायी परेशान हो जाएंगे।
कसौली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र चोपड़ा और सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार ने अभी हिदायतें जारी की है। इसके बाद से ही होटलों में बुकिंग नहीं हो रही है। होटल मालिक भी इस बात से असमंजस में हैं कि टेस्ट कौन जांचेगा। इसके लिए सरकार से बात भी की जा रही है।
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इसे लेकर होटल व्यवसायियों को चिंता सताने लगी है। सरकार की एडवायजरी के अनुसार, हिमाचल के प्रवेश द्वार परवाणू में वैक्सीन और आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं ली जा रही है। इसके बावजूद पर्यटकों की संख्या पर असर दिखना शुरू हो गया है। इन आदेशों के बाद से होटल कारोबारियों में असमंजस बना हुआ है। होटलियर्स सरकार से मांग कर रहे हैं कि आटीपीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता न कर एसओपी का पालन करवाना चाहिए।
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दूसरी लहर में राहत के बाद सरकार ने पर्यटकों के लिए नियमों में राहत दी थी। इसके बाद पर्यटकों ने हिमाचल आना शुरू किया और होटलों में बुकिंग बढ़ने लगी। शुरुआत में वीकेंड पर होटलों में ऑक्यूपेंसी सौ फीसदी रही। इस बीच बरसात ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू किया। इस कारण भी पर्यटकों ने हिमाचल का रुख कम कर दिया। इस दौरान भी होटलों में बुकिंग रद्द हो गई। अब सरकार से जारी आदेशों के बाद बुकिंग पर असर पड़ गया है।
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होटल का खर्च और स्टाफ की चिंता : देवेंद्र
चायल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र वर्मा ने कहा कि सरकार के आदेशों के बाद होटल के बुकिंग रद्द हो गई। अब होटल व्यवसायियों को एक बार फिर मंदी की मार झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि होटलों में ठहरे पर्यटकों से अभी तक कोई भी कोरोना संक्रमण का मामला नहीं आया है और न ही स्टाफ से। सभी के टेस्ट करवाए गए थे। सभी होटलों में एसओपी की पूरी तरह से पालना की जा रही है। होटलों में इसी तरह ऑक्यूपेंसी गिरती रही तो होटलों का खर्च और स्टाफ का वेतन की चिंता से व्यवसायी परेशान हो जाएंगे।
कसौली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र चोपड़ा और सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार ने अभी हिदायतें जारी की है। इसके बाद से ही होटलों में बुकिंग नहीं हो रही है। होटल मालिक भी इस बात से असमंजस में हैं कि टेस्ट कौन जांचेगा। इसके लिए सरकार से बात भी की जा रही है।