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कोविड डेल्टा वैरिएंट के 10 मामले आने से महकमा अलर्ट
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सोलन। जिला सोलन में 10 लोगों में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट पाया गया है। इसका खुलासा जीनोम स्टडी में हुआ है। ये सैंपल जिला स्वास्थ्य विभाग ने रैंडम आधार पर लगभग एक से डेढ़ माह पहले जांच के लिए भेजे थे। इनकी रिपोर्ट हाल ही में जिला स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंची है। राहत की बात यह है कि जिन लोगों में इस वेरिएंट की पुष्टि हुई है, वे पूरी तरह स्वस्थ है। हालांकि रिपोर्ट आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
कोरोना से दूसरी लहर से निपटने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली थी। अब स्वास्थ्य विभाग को नए वैरिएंट ने अलर्ट कर दिया है। वेरिएंट की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियों का जायजा लिया है। बताया जा रहा है कि कोरोना के मेन वायरस ने फिर म्यूटेट किया है। इसके चलते जांच के लिए भेजे सैंपलों को जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए भेजा गया। इससे पहले दूसरी लहर में यूके स्ट्रेन की पुष्टि जीनोम स्टडी के आधार पर हुई थी।
उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि जिले में जीनोम जांच के लिए भेजे सैंपलों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। ये सैंपल एक से डेढ़ माह पहले भेजे गए थे। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। बस, सतर्क रहें।
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वायरस की पहचान के लिए होता है जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट
बड़ी आबादी में किसी वायरस के छोटे समूह की पहचान करने के लिए जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट करवाया जाता है। यह टेस्ट इसकी पहचान में मदद करता है। लोगों को इस छोटे समूह में वास्तव में या तो किसी बीमारी होने का खतरा अधिक हो सकता है और उस बीमारी का विकास हो सकता है। इस बारे में पता लगाने के लिए इस टेस्ट की आवश्यकता पड़ती है।
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कोरोना से दूसरी लहर से निपटने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली थी। अब स्वास्थ्य विभाग को नए वैरिएंट ने अलर्ट कर दिया है। वेरिएंट की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियों का जायजा लिया है। बताया जा रहा है कि कोरोना के मेन वायरस ने फिर म्यूटेट किया है। इसके चलते जांच के लिए भेजे सैंपलों को जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए भेजा गया। इससे पहले दूसरी लहर में यूके स्ट्रेन की पुष्टि जीनोम स्टडी के आधार पर हुई थी।
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उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि जिले में जीनोम जांच के लिए भेजे सैंपलों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। ये सैंपल एक से डेढ़ माह पहले भेजे गए थे। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। बस, सतर्क रहें।
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वायरस की पहचान के लिए होता है जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट
बड़ी आबादी में किसी वायरस के छोटे समूह की पहचान करने के लिए जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट करवाया जाता है। यह टेस्ट इसकी पहचान में मदद करता है। लोगों को इस छोटे समूह में वास्तव में या तो किसी बीमारी होने का खतरा अधिक हो सकता है और उस बीमारी का विकास हो सकता है। इस बारे में पता लगाने के लिए इस टेस्ट की आवश्यकता पड़ती है।