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ठंडोली निवासी महिला ने पीजीआई चंडीगढ़ में तीन बच्चों को दिया जन्म
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तीन बच्चों को जन्म देने के बाद पांवटा अस्पताल में उपचाराधीन ठंडोली गांव की महिला।
- फोटो : NAHAN
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिरमौर जनपद के धारटीधार की बिरला पंचायत के ग्राम ठंडोली निवासी महिला ने तीन बच्चों को जन्म दिया है जिसमें दो बेटे और एक बेटी शामिल है। करीब नौ वर्ष बाद दंपति के पास संतान हुई है।
शुरुआती दौर में पीजीआई में प्रसूति के बाद एक नवजात बेटे की हालत गंभीर थी। वजन गिरने के साथ लगातार उल्टी हो रही थी। वहां पर दो तीन दिनों से ज्यादा बचने की कम ही उम्मीद जताई थी लेकिन दंपति ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बच्चे को घर ले जाने की जगह सिविल अस्पताल पांवटा में उपचार करवाना ज्यादा बेहतर समझा। अब उपचार के बाद मां और तीनों नवजात बच्चे स्वस्थ है। सिविल अस्पताल प्रबंधन के बेहतर उपचार से नवजात को नवजीवन मिलने पर दंपति बेहद खुश हैं।
धारटीधार के ठंडोली निवासी प्रदीप सिंह और बसंती देवी दंपति के पास नौ वर्षों से संतान नहीं हो रही थी। इसके बाद लुधियाना के एक अस्पताल में उपचार चला। पांवटा के एक पेट्रोल पंप में कार्यरत प्रदीप सिंह ने बताया कि सात जुलाई को पीजीआई में तीनों बच्चे पैदा हुए। इसमें दो बेटे और एक बेटी शामिल हैं। प्रदीप ने बताया कि बीच वाले बेटे का वजन मात्र 1.300 किग्रा था। इस नवजात को सांस लेने में दिक्कत थी। उल्टी ज्यादा हो रही थी। पीजीआई प्रबंधन ने भी बच्चे के दो तीन दिन से ज्यादा बच पाने में आशंका जताई लेकिन वह बच्चे को घर लाने की बजाए सिविल अस्पताल पांवटा में ले आए।
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इस दौरान बच्चे का वजन मात्र एक किलोग्राम रह गया था। उपचार के बाद अब बच्चा मां का दूध पीने लगा है। वजन भी बढ़ने लगा है और काफी स्वस्थ है। बड़े नवजात बेटे का वजन 1.870 किलोग्राम, बीच वाले बेटे का वजन 1.250 और बेटी का वजन अब 1.540 किग्रा हो गया है। जच्चा-बच्चा पांवटा अस्पताल के विशेष शिशु वार्ड में उपचारित हैं। बाल रोग विशेषज्ञ अब सबको घर भेजने की तैयारी में हैं।
प्रदीप पेट्रोल पंप पर कार्यरत है। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपनी पत्नी व नवजात तीनों बच्चों के उपचार में कोई कसर नहीं रखी है। एक बच्चे को पीजीआई से जवाब दिए जाने पर भी हिम्मत नहीं हारी। पांवटा अस्पताल में उपचार के बाद तीनों नवजात स्वस्थ है। प्रदीप सिंह ने इसके लिए पांवटा अस्पताल प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन, प्रबंधन वर्ग और स्टॉफ का आभार प्रकट किया है। पांवटा अस्पताल प्रभारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन ने कहा कि शीघ्र ही सभी को अब घर भेज दिया जाएगा।
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शुरुआती दौर में पीजीआई में प्रसूति के बाद एक नवजात बेटे की हालत गंभीर थी। वजन गिरने के साथ लगातार उल्टी हो रही थी। वहां पर दो तीन दिनों से ज्यादा बचने की कम ही उम्मीद जताई थी लेकिन दंपति ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बच्चे को घर ले जाने की जगह सिविल अस्पताल पांवटा में उपचार करवाना ज्यादा बेहतर समझा। अब उपचार के बाद मां और तीनों नवजात बच्चे स्वस्थ है। सिविल अस्पताल प्रबंधन के बेहतर उपचार से नवजात को नवजीवन मिलने पर दंपति बेहद खुश हैं।
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धारटीधार के ठंडोली निवासी प्रदीप सिंह और बसंती देवी दंपति के पास नौ वर्षों से संतान नहीं हो रही थी। इसके बाद लुधियाना के एक अस्पताल में उपचार चला। पांवटा के एक पेट्रोल पंप में कार्यरत प्रदीप सिंह ने बताया कि सात जुलाई को पीजीआई में तीनों बच्चे पैदा हुए। इसमें दो बेटे और एक बेटी शामिल हैं। प्रदीप ने बताया कि बीच वाले बेटे का वजन मात्र 1.300 किग्रा था। इस नवजात को सांस लेने में दिक्कत थी। उल्टी ज्यादा हो रही थी। पीजीआई प्रबंधन ने भी बच्चे के दो तीन दिन से ज्यादा बच पाने में आशंका जताई लेकिन वह बच्चे को घर लाने की बजाए सिविल अस्पताल पांवटा में ले आए।
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इस दौरान बच्चे का वजन मात्र एक किलोग्राम रह गया था। उपचार के बाद अब बच्चा मां का दूध पीने लगा है। वजन भी बढ़ने लगा है और काफी स्वस्थ है। बड़े नवजात बेटे का वजन 1.870 किलोग्राम, बीच वाले बेटे का वजन 1.250 और बेटी का वजन अब 1.540 किग्रा हो गया है। जच्चा-बच्चा पांवटा अस्पताल के विशेष शिशु वार्ड में उपचारित हैं। बाल रोग विशेषज्ञ अब सबको घर भेजने की तैयारी में हैं।
प्रदीप पेट्रोल पंप पर कार्यरत है। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपनी पत्नी व नवजात तीनों बच्चों के उपचार में कोई कसर नहीं रखी है। एक बच्चे को पीजीआई से जवाब दिए जाने पर भी हिम्मत नहीं हारी। पांवटा अस्पताल में उपचार के बाद तीनों नवजात स्वस्थ है। प्रदीप सिंह ने इसके लिए पांवटा अस्पताल प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन, प्रबंधन वर्ग और स्टॉफ का आभार प्रकट किया है। पांवटा अस्पताल प्रभारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन ने कहा कि शीघ्र ही सभी को अब घर भेज दिया जाएगा।