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Sirmour News: 13 सालों में बीस फीट धंसा शमाह गांव, दरारों के मकानों में दहशत में जीवन

Fri, 07 Nov 2025 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 11:58 PM IST
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shamah village not shirted after 13 years
शमाह गांव में मकानों में आई दरारें। संवाद
एक्सक्लूसिव
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जियोलॉजिकल सर्वे टीम ने गांव को ठहरने के लिए किया है असुरक्षित घोषित
गांव के 36 घरों को किया जाना था शिफ्ट
शायद बड़े हादसे के इंतजार में हैं प्रशासन
सुंदर चौहान
कफोटा (सिरमौर)। कफोटा उपमंडल की शमाह पमता पंचायत का शमाह गांव 13 सालों में करीब बीस फीट धंस गया है। लगातार गांव धंसने से लोगों के घरों में दरारें आ गई हैं। आसमान में बादल छाने और बारिश शुरू होते ही ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। इन गांव के लोग दहशत में जी रहे हैं।
सिस्टम की बेरूखी देखिए कि 13 साल बीत जाने के बाद भी यह गांव शिफ्ट नहीं हो पाया है। शायद यहां किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद शायद फायलें आगे खिसकेंगी।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में पहली बार गांव के कुछ घरों में मामूली दरारें दिखीं थीं, जो साल-दर-साल बढ़ रही हैं। इसके बाद लोगों ने जिला प्रशासन को शिकायत भेजी। प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया और एक रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को भेजी। प्रदेश सरकार ने गांव में जियोलॉजिकल सर्वे की टीम भेजकर मुआयना करवाया। रिपोर्ट में बताया गया था कि गांव के नीचे कठोर चट्टान की बजाय दलदल है जो बरसात होने पर धंसता जाता है। यही कारण है कि गांव धंस रहा है।
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जियोलॉजिकल सर्वे टीम ने इस गांव को ठहरने के लिए असुरक्षित बता दिया था। प्रदेश की तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने गांव के 36 घरों को दूसरी जगह पर स्थानांतरित करने के लिए पांवटा के रामपुर घाट में तीन-तीन बिस्वा जमीन के पट्टे दिए। हैरानी की बात है कि यह जमीन अभी तक गांव के सुपुर्द नहीं की गई। गांव के लोगों को पट्टे तो थमा दिए जबकि उस जमीन पर स्थानीय लोग अपना कब्जा किए हुए हैं। इसके चलते शमाह गांव का एक भी परिवार वहां पर नहीं बस पाया।
आज आलम तह है कि जब थोड़ी तेज बारिश होती है तो गांव वालों की रात की धड़कनें बढ़ जाती हैं। नींद नहीं आने से ग्रामीण रात भर जागते हैं। शमाह गांव के मायाराम, चूहीराम, सुरेंद्र सिंह, नरेद्र, बाबूराम, उदय सिंह आदि ने बताया कि हर साल जब भी बरसात होती है उनको पूरे दो महीने नींद नहीं आती। उनके घरों में इतनी बड़ी दरारें आ गई हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सांप आदि जहरीले जीवों का खतरा भी बना रहता है।
-गांव को दूसरी जगह पर बसाने के लिए सभी परिवारों को 2013 में जमीन के पट्टे दे दिए थे, अगर उस पर अभी तक कोई घर नहीं बना और जमीन विवाद होगा तो प्रशासन से दोबारा इसकी जांच करवाई जाएगी।

-हर्षवर्धन सिंह चौहान, स्थानीय विधायक एवं उद्योग मंत्री हिमाचल सरकार

शमाह गांव में मकानों में आई दरारें। संवाद

शमाह गांव में मकानों में आई दरारें। संवाद

शमाह गांव में मकानों में आई दरारें। संवाद

शमाह गांव में मकानों में आई दरारें। संवाद

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