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Sirmour News: वार्षिक परीक्षा प्रणाली के छात्रों को विशेष अवसर देने की मांग
Sat, 17 Oct 2026 01:36 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:36 AM IST
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रिजल्ट में देरी और एनईपी के फेर में उलझे हजारों छात्र, बिना कक्षाएं कैसे देंगे परीक्षाएं
प्रोविजनल एडमिशन के बाद री-इवैल्युएशन ने बिगाड़ा खेल, विशेष अवसर की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश में कॉलेज स्तर पर वार्षिक परीक्षा प्रणाली के तहत पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में है। प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणामों में देरी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के नियमों के बीच तालमेल न होने से छात्र परेशान हैं। प्रभावित विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को संयुक्त ज्ञापन भेजकर दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में केवल अनुत्तीर्ण विषयों की परीक्षा देने के लिए विशेष अंतिम अवसर देने की मांग की है।
छात्रों के अनुसार, बीएससी प्रथम वर्ष का परिणाम 31 अगस्त को घोषित किया गया। इससे पहले ही विद्यार्थियों को द्वितीय वर्ष में प्रोविजनल प्रवेश मिल चुका था। वे पांच से छह महीने तक नियमित कक्षाएं लगाने के साथ प्रैक्टिकल भी पूरे कर चुके थे। परिणाम में कंपार्टमेंट आने के बाद उन्होंने री-चेकिंग और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, लेकिन इस प्रक्रिया में भी काफी समय लग गया।
पुनर्मूल्यांकन के बाद भी कई विद्यार्थी कुछ विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो सके। दूसरी ओर, एनईपी के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं अप्रैल 2026 में शुरू हो गई थीं और अब अक्टूबर में परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। वार्षिक परीक्षा प्रणाली के तहत द्वितीय वर्ष की कक्षाओं में व्यस्त रहने के कारण प्रभावित विद्यार्थी एनईपी की कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाए। उनके हाउस टेस्ट और असाइनमेंट भी पूरे नहीं हुए, जिससे इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल के अंक मिलने में परेशानी हो सकती है।
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विद्यार्थियों का कहना है कि एनईपी का पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और परीक्षा प्रणाली उनके लिए नई है। ऐसे में बिना कक्षाएं लगाए और पर्याप्त तैयारी के सेमेस्टर परीक्षा देना मुश्किल होगा।
छात्र पंकज, पूनम चौहान, राहुल शर्मा, विकास ठाकुर, अंजलि ठाकुर और प्रियंका वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि विश्वविद्यालय और परीक्षा प्रक्रिया में देरी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो हजारों विद्यार्थियों का एक साल बर्बाद हो सकता है।
विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में केवल अनुत्तीर्ण विषयों की परीक्षा पास करने के लिए विशेष अंतिम अवसर दिया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बच सके।
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प्रोविजनल एडमिशन के बाद री-इवैल्युएशन ने बिगाड़ा खेल, विशेष अवसर की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश में कॉलेज स्तर पर वार्षिक परीक्षा प्रणाली के तहत पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में है। प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणामों में देरी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के नियमों के बीच तालमेल न होने से छात्र परेशान हैं। प्रभावित विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को संयुक्त ज्ञापन भेजकर दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में केवल अनुत्तीर्ण विषयों की परीक्षा देने के लिए विशेष अंतिम अवसर देने की मांग की है।
छात्रों के अनुसार, बीएससी प्रथम वर्ष का परिणाम 31 अगस्त को घोषित किया गया। इससे पहले ही विद्यार्थियों को द्वितीय वर्ष में प्रोविजनल प्रवेश मिल चुका था। वे पांच से छह महीने तक नियमित कक्षाएं लगाने के साथ प्रैक्टिकल भी पूरे कर चुके थे। परिणाम में कंपार्टमेंट आने के बाद उन्होंने री-चेकिंग और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, लेकिन इस प्रक्रिया में भी काफी समय लग गया।
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पुनर्मूल्यांकन के बाद भी कई विद्यार्थी कुछ विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो सके। दूसरी ओर, एनईपी के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं अप्रैल 2026 में शुरू हो गई थीं और अब अक्टूबर में परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। वार्षिक परीक्षा प्रणाली के तहत द्वितीय वर्ष की कक्षाओं में व्यस्त रहने के कारण प्रभावित विद्यार्थी एनईपी की कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाए। उनके हाउस टेस्ट और असाइनमेंट भी पूरे नहीं हुए, जिससे इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल के अंक मिलने में परेशानी हो सकती है।
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विद्यार्थियों का कहना है कि एनईपी का पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और परीक्षा प्रणाली उनके लिए नई है। ऐसे में बिना कक्षाएं लगाए और पर्याप्त तैयारी के सेमेस्टर परीक्षा देना मुश्किल होगा।
छात्र पंकज, पूनम चौहान, राहुल शर्मा, विकास ठाकुर, अंजलि ठाकुर और प्रियंका वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि विश्वविद्यालय और परीक्षा प्रक्रिया में देरी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो हजारों विद्यार्थियों का एक साल बर्बाद हो सकता है।
विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में केवल अनुत्तीर्ण विषयों की परीक्षा पास करने के लिए विशेष अंतिम अवसर दिया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बच सके।