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Sirmour News: क्रस्ना लैब में पसरा सन्नाटा, सरकारी प्रयोगशाला में लगी मरीजों की कतार
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मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में लगी मरीजों की कतार। संवाद
-मेडिकल कॉलेज नाहन में दूसरे दिन भी हड़ताल से चरमराई जांच व्यवस्था, मरीज हुए परेशान
सरकारी लैब पर दोगुना बढ़ा काम का बोझ, मशीनों की क्षमता से अधिक नमूनों की जांच बनी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। क्रस्ना लैब के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज नाहन समेत जिले के विभिन्न अस्पतालों में जांच व्यवस्था दूसरे दिन भी प्रभावित रहीं। मंगलवार को क्रस्ना लैब में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच करवाने के लिए मरीजों की कतारें लगी रहीं। समय पर टेस्ट नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को मजबूरी में निजी प्रयोगशालाओं का रुख करना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज नाहन की सरकारी प्रयोगशाला में क्रस्ना लैब की हड़ताल का सीधा असर देखने को मिल रहा है। पहले सरकारी लैब में प्रतिदिन करीब 300 मरीजों के टेस्ट होते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 600 तक पहुंच गई है। अचानक दोगुना काम बढ़ने से प्रयोगशाला के कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। वहीं, लैब में लगी मशीनों की क्षमता भी इतने अधिक नमूनों की जांच के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। ऐसे में कर्मचारी अलग-अलग शिफ्टों में मरीजों के खून के नमूने जांच के लिए मशीनों में लगा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीजों की सुविधा के लिए दोपहर दो से शाम चार बजे तक जांच की वैकल्पिक व्यवस्था की है। इसके अलावा ऑन कॉल सुविधा भी रखी गई है। बावजूद इसके मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। दरअसल, ओपीडी का समय शाम चार बजे तक रहता है। इस दौरान चिकित्सक मरीजों की बीमारी का सही पता लगाने के लिए जरूरी जांच लिखते हैं। पहले दोपहर बाद मरीजों को क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाने की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन हड़ताल के कारण अब उन्हें जांच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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क्रस्ना लैब के कर्मचारियों की हड़ताल का जिले के अन्य अस्पतालों में भी जांच सेवाएं प्रभावित रही हैं। सरकारी प्रयोगशालाओं में मरीजों की संख्या बढ़ने से वहां भी अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जिन्हें चिकित्सकों ने उसी दिन जांच करवाकर रिपोर्ट दिखाने की सलाह दी है।
मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने बताया कि क्रस्ना लैब के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सरकारी प्रयोगशाला में मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं, लेकिन वहां काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। प्रबंधन की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।-- -- --
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सरकारी लैब पर दोगुना बढ़ा काम का बोझ, मशीनों की क्षमता से अधिक नमूनों की जांच बनी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। क्रस्ना लैब के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज नाहन समेत जिले के विभिन्न अस्पतालों में जांच व्यवस्था दूसरे दिन भी प्रभावित रहीं। मंगलवार को क्रस्ना लैब में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच करवाने के लिए मरीजों की कतारें लगी रहीं। समय पर टेस्ट नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को मजबूरी में निजी प्रयोगशालाओं का रुख करना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज नाहन की सरकारी प्रयोगशाला में क्रस्ना लैब की हड़ताल का सीधा असर देखने को मिल रहा है। पहले सरकारी लैब में प्रतिदिन करीब 300 मरीजों के टेस्ट होते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 600 तक पहुंच गई है। अचानक दोगुना काम बढ़ने से प्रयोगशाला के कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। वहीं, लैब में लगी मशीनों की क्षमता भी इतने अधिक नमूनों की जांच के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। ऐसे में कर्मचारी अलग-अलग शिफ्टों में मरीजों के खून के नमूने जांच के लिए मशीनों में लगा रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीजों की सुविधा के लिए दोपहर दो से शाम चार बजे तक जांच की वैकल्पिक व्यवस्था की है। इसके अलावा ऑन कॉल सुविधा भी रखी गई है। बावजूद इसके मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। दरअसल, ओपीडी का समय शाम चार बजे तक रहता है। इस दौरान चिकित्सक मरीजों की बीमारी का सही पता लगाने के लिए जरूरी जांच लिखते हैं। पहले दोपहर बाद मरीजों को क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाने की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन हड़ताल के कारण अब उन्हें जांच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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क्रस्ना लैब के कर्मचारियों की हड़ताल का जिले के अन्य अस्पतालों में भी जांच सेवाएं प्रभावित रही हैं। सरकारी प्रयोगशालाओं में मरीजों की संख्या बढ़ने से वहां भी अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जिन्हें चिकित्सकों ने उसी दिन जांच करवाकर रिपोर्ट दिखाने की सलाह दी है।
मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने बताया कि क्रस्ना लैब के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सरकारी प्रयोगशाला में मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं, लेकिन वहां काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। प्रबंधन की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में लगी मरीजों की कतार। संवाद