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बनकला गांव में सिलिंडर में लगी आग, अफरातफरी
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:06 PM IST
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रसोई गैस रिफिलिंग से भड़की आग, तीन दुकानें जली
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
नाहन तहसील के अंतर्गत आने वाले बनकला गांव स्थित एक घर में सोमवार को सिलिंडर में आग लग गई जिससे पूरे घर में अफरातफरी मच गई। सिलिंडर फटने के खतरों के बीच एक व्यक्ति ने अपनी जान पर खेल कर बड़ी मुश्किल से आग बुझा दी जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह बनकला गांव की सरोजबाला पत्नी स्व. यादराम के घर में सुबह 6 बजे रसोईघर में रखे सिलिंडर में आग भड़क गई। सिलिंडर में आग लगी देख सरोजबाला के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। उसने तुरंत सिलिंडर की आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग बुझने की बजाए और भड़क गई जिससे उसने घबरा कर चिल्लाना शुरू कर दिया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के घरों के लोग वहां इकट्ठे हो गए।
भीड़ में शामिल तथा शिक्षा विभाग में शारीरिक शिक्षक पद पर तैनात ताराचंद अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए एक कंबल की सहायता से रसोईघर में घुस गया। उसने जैसे तैसे बड़ी मुश्किल से सिलिंडर में भड़की आग पर काबू पाया। इसके बाद इस डर से कि कहीं सिलिंडर में धमाका न हो जाए उसे रसोई घर से बाहर लाकर खुले खेत में फेंक दिया। समय पर सिलिंडर की आग बुझा दिए जाने से मकान व गऊशाला को उत्पन्न खतरा टल गया। लोगों ने भी राहत की सांस ली।
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नाहन (सिरमौर)।
नाहन तहसील के अंतर्गत आने वाले बनकला गांव स्थित एक घर में सोमवार को सिलिंडर में आग लग गई जिससे पूरे घर में अफरातफरी मच गई। सिलिंडर फटने के खतरों के बीच एक व्यक्ति ने अपनी जान पर खेल कर बड़ी मुश्किल से आग बुझा दी जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह बनकला गांव की सरोजबाला पत्नी स्व. यादराम के घर में सुबह 6 बजे रसोईघर में रखे सिलिंडर में आग भड़क गई। सिलिंडर में आग लगी देख सरोजबाला के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। उसने तुरंत सिलिंडर की आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग बुझने की बजाए और भड़क गई जिससे उसने घबरा कर चिल्लाना शुरू कर दिया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के घरों के लोग वहां इकट्ठे हो गए।
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भीड़ में शामिल तथा शिक्षा विभाग में शारीरिक शिक्षक पद पर तैनात ताराचंद अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए एक कंबल की सहायता से रसोईघर में घुस गया। उसने जैसे तैसे बड़ी मुश्किल से सिलिंडर में भड़की आग पर काबू पाया। इसके बाद इस डर से कि कहीं सिलिंडर में धमाका न हो जाए उसे रसोई घर से बाहर लाकर खुले खेत में फेंक दिया। समय पर सिलिंडर की आग बुझा दिए जाने से मकान व गऊशाला को उत्पन्न खतरा टल गया। लोगों ने भी राहत की सांस ली।
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