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Sirmour News: एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल शुरू, आपातकालीन सेवाएं प्रभावित

Thu, 12 Feb 2026 11:21 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:21 PM IST
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Ambulance workers begin strike, emergency services affected
मेडिकल कॉलेज नाहन परिसर में खड़ी 108 एम्बुलेंस सेवा। संवाद
120 पायलट और ईएमटी सामूहिक हड़ताल पर, 17 फरवरी सुबह 8 बजे तक ऐलान
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जिले में 35 एंबुलेंस संचालन में दिक्कत, ग्रामीण मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
सीमित संसाधनों के सहारे व्यवस्था, केवल मुख्य अस्पतालों में सेवाएं चालू
न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग
पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों में 108-102 बनी जीवनरेखा, सेवा ठप होने से संकट

संवाद न्यूज एजेंसी

नाहन (सिरमौर)। जिले में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं वीरवार से प्रभावित हो गई हैं। जिले भर के करीब 120 पायलट और ईएमटी मांगों को लेकर सामूहिक हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों ने 17 फरवरी सुबह 8 बजे तक हड़ताल पर रहने का ऐलान किया है। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना शुरू हो गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को उपचार के लिए परेशानी हो रही है।

जिले में करीब 25 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत और 10 एंबुलेंस 102 सेवा के तहत संचालित हैं। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से इन सभी हनों का संचालन चुनौती बन गया है। स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएमओ कार्यालय, होमगार्ड और रेडक्रॉस के चालकों की मदद ली है, लेकिन सीमित संसाधनों के चलते सभी एंबुलेंस को नियमित रूप से चलाना संभव नहीं हो पा रहा है। केवल मुख्य अस्पतालों में ही सेवाओं का संचालन हो पा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज नाहन में चार एंबुलेंस तैनात हैं। इनमें से फिलहाल दो को ही संचालित किया गया है। यहां पर सीएमओ कार्यालय से दो चालक, एक सीएचओ और एक फार्मासिस्ट तैनाती की गई हैं। आपातकालीन मामलों में प्राथमिकता के आधार पर सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। सामान्य रेफरल और ग्रामीण इलाकों से मरीजों को लाने-ले जाने में दिक्कतें हो रही हैं।
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इसी तरह पांवटा साहिब, राजगढ़ और सराहां अस्पतालों में नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय करके चालकों और फार्मासिस्टों से काम चलाया जा रहा है। पीएचसी और सीएचसी में सुविधा संचालन के लिए दिक्कतें आ रही हैं। हड़ताली कर्मचारी न्यूनतम वेतन लागू करने, सेवाओं के नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं।

कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने फ्रंटलाइन वॉरियर्स के रूप में जोखिम उठाकर सेवाएं दीं। कठिन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया, संक्रमित क्षेत्रों में ड्यूटी निभाई, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। जिले के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में 108 और 102 सेवाएं जीवनरेखा हैं। गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में इन एंबुलेंस की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में सेवाएं बाधित रहने से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

एंबुलेंस संचालन के लिए सीएमओ कार्यालय से दो चालक और स्वास्थ्य खंड धगेड़ा से फार्मासिस्ट और सीएचओ की तैनाती की गई है।
-डॉ. रेशम, कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
मुख्य अस्पतालों में रेडक्राॅस और होमगार्ड चालकों की सेवाएं ली जा रही हैं। फार्मासिस्ट तैनाती की गई है। सरकार के आदेशानुसार व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
-डॉ. राकेश प्रताप, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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