फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Sirmour News ›   फर्श पर भूखे पेट बैठीं दर्जनों गर्भवती महिलाएं

फर्श पर भूखे पेट बैठीं दर्जनों गर्भवती महिलाएं

Sat, 09 Jun 2018 11:30 PM IST
Updated Sat, 09 Jun 2018 11:30 PM IST
विज्ञापन
फर्श पर भूखे पेट बैठीं दर्जनों गर्भवती महिलाएं
योगेंद्र अग्रवाल
विज्ञापन

ददाहू (सिरमौर)।
सिविल अस्पताल ददाहू में गर्भवती महिलाएं दिनभर भूखे पेट बैठी रहीं लेकिन जांच संबंधी औपचारिकताएं फिर भी पूरी नहीं हो पाई। दूरदराज क्षेत्रों से आई गर्भवती महिलाओं को बिना अल्ट्रासाउंड करवाएं वापस लौटना पड़ा। ऐसे में अस्पताल में आई हुई महिलाओं को दूसरे टेस्ट का भी कोई लाभ नहीं मिल पाया।
करीब चार दर्जन महिलाएं अपने टेस्ट करवाने के लिए शनिवार को अस्पताल पहुंची थीं। कई महिलाएं सुबह से लेकर शाम तक अपनी बारी की इंतजार में फर्श पर बैठी रहीं लेकिन, सवाल यह है कि जब ददाहू अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा ही नहीं है तो महिलाओं के दूसरे टेस्ट का भी क्या फायदा है।
विज्ञापन

गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा निशुल्क होने के बाद भी निजी क्लीनिकों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड कराने पड़ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) की भी धज्जियां उड़ गई हैं। प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाएं अपने नजदीकी अस्पतालों में जांच के लिए पहुंच जाती हैं लेकिन अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा ही नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

महिलाओं का कहना है कि जब यह सुविधा महिलाओं को नहीं मिल रही है तो निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के अलावा दूसरे जरूरी टेस्ट भी किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा आज भी गर्भवती महिलाएं ही नहीं दूसरे मरीजों को भी झेलना पड़ रहा है। जिला के सिविल अस्पताल आज भी रेफरल अस्पताल से ऊपर नहीं उठ पाए हैं। इसका कारण यही है कि सरकारों ने सिविल अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण सुविधा ही प्रदान नहीं की है।
उधर, सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि पूरे जिले में रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। ददाहू अस्पताल जैसे कइयों में अल्ट्रासाउंड की भी सुविधा नहीं है। महीने में एक दिन वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए विभाग को लिखा जा चुका है।

बाक्स--
कैसी विशेष जांच, जब सुविधाएं ही नहीं
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) योजना सरकारी अस्पतालों में दम तोड़ रही है। कहने के लिए अस्पतालों में प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की अलग से विशेष जांच का प्रावधान किया है लेकिन स्थिति ऐसी है कि अस्पतालों में न अल्ट्रासाउंड मशीन है और न ही रेडियोलॉजिस्ट। ऐसे में केंद्र की यह योजना का कोई लाभ नहीं है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed