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सता के उलट चलती रही है नाहन की जनता
Updated Mon, 06 Nov 2017 07:53 PM IST
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महासंग्राम 2017, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव
- फोटो : SELF
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संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)।
सिरमौरी रियासत के हुक्मरानों की राजधानी रहे नाहन में सत्ता का खेल निराला रहा है। यहां की जनता जनार्दन सत्ता के विपरीत रही है। प्रदेश की सत्ता में जो राजनीतिक दल काबिज हुआ, विधायक उसका नहीं बना। यानी, जनमत सत्ता के उलट रहा।
वर्ष 1998 से पहले हालांकि, एक-दो बार विधायक सत्ता पक्ष के बने, लेकिन इसके बाद की स्थिति बिल्कुल उलट रही। खास यह है कि भाजपा का यहां से वर्ष 2012 में पहली बार खाता खुला। भाजपा के डॉ. राजीव बिंदल नाहन से पहले भाजपा विधायक जीतकर विधानसभा तक पहुंचे। लेकिन तब सरकार कांग्रेस की बनी। ऐसे में नाहन से चुने गए विधायक के विपक्ष में बैठने का मिथक इस बार टूटता है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।
दरअसल, नाहन विधानसभा क्षेत्र सिरमौर जिले की हॉट सीट रही है। लेकिन, यहां से चुने जाने वाले विधायक सत्तारूढ़ दल का हिस्सा नहीं बन सके। यही वजह है कि वर्ष 1990 को छोड़कर इस विधानसभा क्षेत्र से चुने गए विधायक कभी मंत्री नहीं बन पाए। वर्ष 1990 में जनता दल से जीतकर विधानसभा पहुंचे श्यामा शर्मा को ही एक बार मंत्री पद हासिल हो पाया था।
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यह सरकार तीन साल ही चल पाई थी। वहीं, वर्ष 1998 से कुछ विधायकों को सत्ता पक्ष के साथ रहने का मौको जरूर मिला। लेकिन इसके बाद से नाहन के जनादेश का ट्रेंड सत्ता के विरोध में ही साबित हुआ। नाहन विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। यहां से अक्सर कांग्रेस के ही विधायक बने। लेकिन, जब प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में काबिज हुई तो विधायक किसी और दल के ही बने।
बॉक्स के लिए----
सिरमौर में रहा है कांग्रेस का दबदबा
सिरमौर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों को लें तो यहां पर कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। वर्ष 1962 से लेकर अब तक सिरमौर की सियासत में भाजपा कई सालों तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पच्छाद और शिलाई में वर्ष 2012 में भाजपा ने पहली बार अपना खाता खोला, जबकि श्री रेणुकाजी में उप चुनाव के दौरान सिर्फ एक बार भाजपा का विधायक बना। अन्य चुनावों में यहां कांग्रेस का ही दबदबा रहा।
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नाहन का सत्ता विरोधी ट्रेंड
वर्ष सरकार विधायक
1998 भाजपा कांग्रेस (कुश परमार)
2003 कांग्रेस लोजपा (सदानंद चौहान)
2007 भाजपा कांग्रेस (कुश परमार)
2012 कांग्रेस भाजपा (डॉ. राजीव बिंदल)
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नाहन (सिरमौर)।
सिरमौरी रियासत के हुक्मरानों की राजधानी रहे नाहन में सत्ता का खेल निराला रहा है। यहां की जनता जनार्दन सत्ता के विपरीत रही है। प्रदेश की सत्ता में जो राजनीतिक दल काबिज हुआ, विधायक उसका नहीं बना। यानी, जनमत सत्ता के उलट रहा।
वर्ष 1998 से पहले हालांकि, एक-दो बार विधायक सत्ता पक्ष के बने, लेकिन इसके बाद की स्थिति बिल्कुल उलट रही। खास यह है कि भाजपा का यहां से वर्ष 2012 में पहली बार खाता खुला। भाजपा के डॉ. राजीव बिंदल नाहन से पहले भाजपा विधायक जीतकर विधानसभा तक पहुंचे। लेकिन तब सरकार कांग्रेस की बनी। ऐसे में नाहन से चुने गए विधायक के विपक्ष में बैठने का मिथक इस बार टूटता है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।
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दरअसल, नाहन विधानसभा क्षेत्र सिरमौर जिले की हॉट सीट रही है। लेकिन, यहां से चुने जाने वाले विधायक सत्तारूढ़ दल का हिस्सा नहीं बन सके। यही वजह है कि वर्ष 1990 को छोड़कर इस विधानसभा क्षेत्र से चुने गए विधायक कभी मंत्री नहीं बन पाए। वर्ष 1990 में जनता दल से जीतकर विधानसभा पहुंचे श्यामा शर्मा को ही एक बार मंत्री पद हासिल हो पाया था।
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यह सरकार तीन साल ही चल पाई थी। वहीं, वर्ष 1998 से कुछ विधायकों को सत्ता पक्ष के साथ रहने का मौको जरूर मिला। लेकिन इसके बाद से नाहन के जनादेश का ट्रेंड सत्ता के विरोध में ही साबित हुआ। नाहन विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। यहां से अक्सर कांग्रेस के ही विधायक बने। लेकिन, जब प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में काबिज हुई तो विधायक किसी और दल के ही बने।
बॉक्स के लिए----
सिरमौर में रहा है कांग्रेस का दबदबा
सिरमौर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों को लें तो यहां पर कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। वर्ष 1962 से लेकर अब तक सिरमौर की सियासत में भाजपा कई सालों तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पच्छाद और शिलाई में वर्ष 2012 में भाजपा ने पहली बार अपना खाता खोला, जबकि श्री रेणुकाजी में उप चुनाव के दौरान सिर्फ एक बार भाजपा का विधायक बना। अन्य चुनावों में यहां कांग्रेस का ही दबदबा रहा।
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नाहन का सत्ता विरोधी ट्रेंड
वर्ष सरकार विधायक
1998 भाजपा कांग्रेस (कुश परमार)
2003 कांग्रेस लोजपा (सदानंद चौहान)
2007 भाजपा कांग्रेस (कुश परमार)
2012 कांग्रेस भाजपा (डॉ. राजीव बिंदल)